जबलपुर में डाकघर के 179 खातों से 65 लाख रुपये का गबन, सह-आरोपी को चार साल की सजा
जबलपुर के मोतीनाला डाकघर में 65 लाख के गबन मामले में सीबीआई अदालत ने सह-आरोपी पुनीत सेन को चार साल की सजा सुनाई है। मुख्य आरोपी उप डाकपाल की मौत हो चुकी है।
Publish Date: Sun, 01 Nov 2026 09:38:57 AM (IST)Updated Date: Sun, 01 Nov 2026 09:38:57 AM (IST)
जबलपुर में डाकघर के 179 खातों से 65 लाख रुपये का गबन। (एआई जनरेटेड)HighLights
- मोतीनाला उप डाकघर में 65 लाख रुपये का भारी गबन।
- 177 बचत और दो सुकन्या खातों की रकम हड़पी गई।
- सीबीआई कोर्ट ने सह-आरोपी पुनीत को 4 साल सजा सुनाई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर : मोतीनाला उप डाकघर में गरीब खाताधारकों की बचत पर हाथ साफ करने के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सह-आरोपित पुनीत सेन को दोषसिद्ध कर चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। 65 लाख रुपये से अधिक के इस गबन में 177 बचत बैंक खातों और दो सुकन्या समृद्धि खातों की राशि का दुरुपयोग किया गया था। विशेष न्यायाधीश रूपेश गुप्ता ने 31 अक्टूबर को विभिन्न धाराओं में सजा और अर्थदंड से दंडित किया।
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, जबलपुर के अनुसार, 11 सितंबर 2020 से नौ अप्रैल 2022 के बीच तत्कालीन उप डाकपाल बलवान शाह भलावी और जीडीएस आउटसाइडर पुनीत सेन ने मिलकर कुल 65 लाख दो हजार 488 रुपये का गबन किया। खाताधारकों की पासबुक में जमा राशि की प्रविष्टियां कर मुहर लगा दी जाती थी, जिससे उन्हें अपनी रकम जमा होने का भरोसा बना रहे। लेकिन यही लेन-देन डाकघर के आधिकारिक अभिलेखों, दैनिक लेन-देन रिपोर्ट, लान्ग बुक और फिनेकल लेजर में दर्ज नहीं किया जाता था।
पासबुक में जमा, सरकारी रिकॉर्ड में गायब
- जांच में यह भी सामने आया कि खातों से रकम निकालने के लिए निकासी वाउचरों पर कूटरचित हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान का इस्तेमाल किया गया। यानी खाताधारकों की पासबुक में उनकी बचत सुरक्षित दिखाई देती रही, जबकि विभागीय रिकार्ड में उस जमा का हिसाब ही नहीं था।
- सीबीआई ने खाताधारकों के बयान, पासबुक, निकासी वाउचर और डाकघर के दस्तावेज जुटाए। हस्तलेखन एवं दस्तावेजों की जांच के लिए सीएफएसएल भोपाल की वैज्ञानिक रिपोर्ट को भी साक्ष्य के रूप में पेश किया गया।
मुख्य आरोपित की मृत्यु, सह-आरोपित को सजा
- प्रकरण के मुख्य आरोपित तत्कालीन उप डाकपाल बलवान शाह भलावी की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई थी। इस कारण उनके विरुद्ध न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई, लेकिन पुनीत सेन के विरुद्ध सुनवाई जारी रही। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे दोषसिद्ध किया।