5 महीने बाद भी नहीं शुरू हुआ शहपुरा आरओबी, अब डेढ़ साल तक 20 KM अतिरिक्त सफर झेलेंगे यात्री
जबलपुर-भोपाल एनएच-45 पर शहपुरा आरओबी ध्वस्त होने के पांच माह बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ। 43 करोड़ की परियोजना के टेंडर 30 जुलाई को खुलेंगे, राहत में...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 12:03:01 PM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 12:03:01 PM (IST)
5 महीने बाद भी नहीं शुरू हुआ शहपुरा आरओबी। (नईदुनिया)HighLights
- पांच माह बाद भी शहपुरा आरओबी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
- 30 जुलाई को नए पुल निर्माण के टेंडर खुलेंगे।
- 43 करोड़ लागत से बायोडक्ट तकनीक वाला पुल बनेगा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर स्थित शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के ध्वस्त हुए पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन नए पुल के निर्माण की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि अब तक नींव भी नहीं रखी गई है।
अब मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने नए डिजाइन पर 43 करोड़ रुपये की लागत से पुल बनाने का निर्णय लिया है, लेकिन इसके लिए अभी निविदा प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। 30 जुलाई को टेंडर खुलेंगे और निर्माण एजेंसी के चयन के बाद काम शुरू होगा। ऐसे में अगले कम से कम नौ माह तक लोगों को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
9 माह और लोगों को होगी परेशानी
- इसका सीधा मतलब यह है कि पुल ढहने के बाद बीत चुके पांच माह और अब आगे के नौ माह मिलाकर करीब डेढ़ साल तक जबलपुर-भोपाल मार्ग से आने-जाने वाले हजारों लोगों को रोज लगभग 20 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ेगा। इससे समय, ईंधन और परिवहन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि स्थानीय व्यापार और आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है।
- यह आरओबी फरवरी में अचानक ध्वस्त होने के बाद चर्चा में आया था। पुल का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रशासन को तत्काल यातायात बंद कर डायवर्ट करना पड़ा था। इसके बाद से राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर यातायात वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया जा रहा है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, जिन्हें अब लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
पुराना डिजाइन बदला, अब बायोडक्ट तकनीक से बनेगा पुल
- एमपीआरडीसी के मुख्य अभियंता राजेश जैन के अनुसार पहले पुल का निर्माण आरई वान तकनीक से किया गया था। अब तकनीकी परीक्षण और विशेषज्ञों की सलाह के बाद इसे बायोडक्ट प्रणाली से बनाया जाएगा।
- नई तकनीक को अधिक सुरक्षित और दीर्घकालिक माना जा रहा है। नए डिजाइन के कारण परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 43 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
- जानकारी के अनुसार शुरुआत में परियोजना लगभग 15 करोड़ रुपये की थी और उसी आधार पर निविदा तथा अनुबंध हुए थे। बाद में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने डिजाइन में बदलाव की अनुशंसा की। पहले पाइल फाउंडेशन तकनीक पर भी विचार हुआ, जिससे लागत 40 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई थी।
- अतिरिक्त वित्तीय भार और तकनीकी मतभेदों के कारण निर्माण कार्य लंबे समय तक अटका रहा। आखिरकार तकनीकी संशोधनों के साथ नए डिजाइन को अंतिम मंजूरी दी गई।
30 जुलाई को खुलेंगे टेंडर, फिर शुरू होगा काम
विभागीय अधिकारियों के अनुसार फिलहाल नई निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। 30 जुलाई को टेंडर खोले जाएंगे, जिसके बाद निर्माण एजेंसी का चयन होगा। इसके बाद ही वास्तविक निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। विभाग का दावा है कि निर्माण एजेंसी तय होने के बाद करीब नौ माह में पुल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन तब तक लोगों को मौजूदा डायवर्जन से ही गुजरना होगा।
डायवर्जन मुश्किल भरा सफर
- एमपीआरडीसी ने वैकल्पिक मार्गों को मजबूत करने का दावा किया है करीब 90 लाख रुपये की लागत से शहपुरा मंडी मार्ग, घंसौर रोड और पाटन-जबलपुर दिशा के वैकल्पिक रास्तों पर पैचवर्क, डामरीकरण और सड़क चौड़ीकरण कराने की बात हुई है लेकिन हकीकत में सड़क बेहद परेशानी भरा है।
- शहपुरा टाउन के भीतर से निकलना वाहनों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है करीब तीन-चार किलोमीटर का यह सफर वाहन चालकों को रूलाने वाला है।
एनएच-45 की रफ्तार पर ब्रेक
- राष्ट्रीय राजमार्ग-45 मध्यप्रदेश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। यह जबलपुर को भोपाल, नरसिंहपुर, गाडरवारा सहित कई शहरों से जोड़ता है। प्रतिदिन हजारों यात्री वाहन, बसें और मालवाहक ट्रक इसी मार्ग से गुजरते हैं। आरओबी बंद होने के बाद न केवल यात्रा का समय बढ़ गया है, बल्कि परिवहन लागत भी बढ़ी है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लंबे डायवर्जन का असर माल परिवहन और कारोबार पर भी पड़ रहा है। एमपीआरडीसी के अधिकारियों का कहना है कि नए डिजाइन में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने और पुल लंबे समय तक सुरक्षित रहे। फैक्ट फाइल
- फरवरी में क्षतिग्रस्त हुआ था शहपुरा आरओबी।
- पांच माह बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं।
- 30 जुलाई को खुलेंगे निर्माण के टेंडर।
- 43 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा नया पुल।
- बायोडक्ट तकनीक से होगा निर्माण।
- कम से कम अगले नौ माह तक रहेगा डायवर्जन।
- पुल बंद होने से कुल करीब डेढ़ साल तक लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
- प्रतिदिन करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है।
- डायवर्जन मार्गों के सुधार पर 90 लाख रुपये खर्च होंगे।
ये खबर भी पढ़ें- ग्वालियर में इंटरनेशनल ठगी गिरोह का पर्दाफाश: मोहना के होटल में चल रहा था कॉल सेंटर, अमेरिकन नागरिकों को बनाते थे शिकार