
आलोक बैनर्जी, नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। व्हीकल फैक्ट्री देश के अर्धसैनिक बलों के लिए वाटर बाउजर की नई खेप तैयार करने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सीआरपीएफ, बीएसएफ और आइटीबीपी के लिए बनने वाले इन वाहनों की पहली खेप में 52 वाटर बाउजर शामिल होंगे। रक्षा मंत्रालय से इनका उत्पादन आदेश मिल चुका है।
शक्तिमान चेसिस पर आधारित ये वाहन केवल पानी की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में जवानों की जरूरतों के अनुरूप कई भूमिकाएं निभा सकेंगे। इनमें 12 हजार लीटर तक पानी ले जाने की क्षमता, स्टेनलेस स्टील के टैंक, पानी शुद्ध करने की इकाई और 60 मीटर तक तेज धार फेंकने वाला हाई-प्रेशर वाटर मॉनिटर होगा।
वाहन को 4गुणा4 और 6गुणा6 दोनों श्रेणी में तैयार किया जा रहा है। बख्तरबंद केबिन, विशेष टायर प्रणाली और 380 मिलीमीटर ग्राउंड क्लीयरेंस इसे नक्सल प्रभावित जंगलों से लेकर रेतीले इलाकों तक उपयोगी बनाएंगे। फैक्ट्री के अनुसार, प्रोटोटाइप परीक्षण के दौरान माइनस 45 से 55 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में दो हजार किलोमीटर चला और कोई खराबी दर्ज नहीं हुई। श्रमिक सूत्रों के अनुसार यह परियोजना रक्षा उत्पादन में स्वदेशी निर्माण की दिशा में व्हीकल फैक्ट्री की एक और पहल है।
यह नया वाटर बाउजर 4गुणा4 और 6गुणा6 दोनों कान्फिगरेशन में तैयार किया जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं।
क्षमता और तकनीक: इसमें 12,000 लीटर तक पानी ले जाने की क्षमता होगी। टैंक स्टेनलेस स्टील 304 ग्रेड का बनाया जा रहा है ताकि पानी लंबे समय तक स्वच्छ रहे और जंग न लगे। टैंक के अंदर फूड-ग्रेड इपाक्सी कोटिंग की गई है, जिससे जवानों को पीने का शुद्ध पानी मिल सके।
दंगा नियंत्रण और फायर फाइटिंग में सक्षम: वाहन में हाई-प्रेशर वाटर मानिटर सिस्टम लगाया गया है, जो 60 मीटर तक पानी की तेज धार फेंक सकता है। इसका इस्तेमाल दंगा नियंत्रण और जंगल में लगी आग बुझाने में किया जा सकेगा। इसके लिए तीन अलग-अलग नोजल मोड रखे गए हैं - जेट, स्प्रे और फाग।
ऑल-टेरेन कैपेबिलिटी: छत्तीसगढ़ के नक्सल इलाकों और राजस्थान के रेगिस्तान में पानी की सबसे ज्यादा किल्लत होती है। इसलिए इस वाहन को व्हीकल फैक्ट्री के ट्रेडमार्क "शक्तिमान" चेसिस पर बनाया जा रहा है। इसमें सेंट्रल टायर इंफ्लेशन सिस्टम होगा, जिससे रेत या कीचड़ में फंसे टायर का प्रेशर ड्राइवर केबिन से ही कम-ज्यादा किया जा सकेगा। ग्राउंड क्लीयरेंस 380 मिमी रखा गया है।
सेल्फ-प्रोटेक्शन: जवानों की सुरक्षा के लिए केबिन को आर्मर्ड बनाया गया है। यह छोटे हथियारों की फायरिंग और आइईडी के छोटे धमाकों को झेल सकता है। केबिन में वाटर प्यूरिफिकेशन यूनिट भी लगाई गई है।
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नई खेप आत्मनिर्भर भारत की एक झलक: व्हीकल फैक्ट्री प्रोटोटाइप का ट्रायल सफल रहा है।
45 डिग्री से लेकर 55 डिग्री तापमान में इस वाहन ने बिना किसी ब्रेकडाउन के 2000 किमी का ट्रायल पूरा किया है। गौरतलब है कि व्हीकल फैक्ट्री पहले भी सेना के लिए पांच टन, 2.5 टन शक्तिमान, एलपीटीए 715 और बुलेट प्रूफ वाहन बनाकर देश को आत्मनिर्भर बना चुकी है।
वाटर बाउजर की यह नई खेप 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक और बड़ा कदम है, जिससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।