
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। भागदौड़ भरी जिंदगी में स्मार्टफोन अब सिर्फ बातचीत और मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है। महिलाएं और कालेज के छात्र-छात्राएं मोबाइल ऐप्स की मदद से अपनी सेहत पर भी नजर रख रहे हैं। नींद, हार्ट रेट, पल्स और रोजाना की शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी अब मोबाइल में दर्ज हो रही है। यही वजह है कि हेल्थ ट्रैकिंग ऐप्स कई लोगों के लिए ‘पर्सनल हेल्थ असिस्टेंट’ की तरह काम कर रहे हैं।
शुभम कौशल के मुताबिक, इन ऐप्स से रोजमर्रा की दिनचर्या को प्लान करने में भी सुविधा मिलती है। खासकर युवाओं के बीच डिजिटल तरीके से स्वास्थ्य संबंधी रिकार्ड रखने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। एक समय था जब महिलाएं कैलेंडर या डायरी में हिसाब -किताब दर्ज करती थीं। अब यही काम मोबाइल ऐप्स कुछ सेकंड में कर रहे हैं।
इन स्मार्ट ऐप्स की खूबी यह है कि यह केवल स्वास्थ्य की निगरानी तक ही सीमित नहीं हैं। महिलाएं नींद के घंटे और अन्य शारीरिक लक्षणों को भी बारीकी से दर्ज कर रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल हेल्थ हिस्ट्री भविष्य में डाॅक्टर से परामर्श करने के दौरान बेहद मददगार साबित होती है।
हालांकि ऐप्स का उपयोग कई बार स्वास्थ्य के लिए घातक भी हो सकता है। विशेषज्ञ डॉ. बीएस दुल्हानी का कहना है कि "हेल्थ मानिटरिंग के लिए मोबाइल ऐप्स एक बेहतरीन जरिया हैं, लेकिन इनमें मिलने वाले हर सुझाव को आंख मूंदकर सच मान लेना सही नहीं है।
ऐप्स के अनुमान के आधार पर बिना चिकित्सकीय परामर्श के कोई भी गंभीर हेल्थ प्लान या दवा लेने से बचना चाहिए। ये तकनीक सुविधा के लिए हैं, लेकिन इन्हें डाॅक्टर की सलाह का विकल्प बिल्कुल नहीं माना जाना चाहिए।" तकनीक का लाभ उठाएं, इसे अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं, लेकिन किसी भी स्वास्थ्य समस्या के दिखने पर हमेशा योग्य डॉक्टर की सलाह ही लें।
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