
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से ए ग्रेड मिलने के बावजूद शैक्षणिक विस्तार की एक अहम योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
महाकोशल क्षेत्र के विद्यार्थियों को घर बैठे उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2025 में दूरस्थ शिक्षा शुरू करने की कवायद की गई थी, लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी इस दिशा में ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।
न पाठ्यक्रमों का खाका स्पष्ट हुआ है और न ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की समयसीमा सामने आई है। इससे उन विद्यार्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है, जो नियमित कक्षाओं में शामिल हुए बिना उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं।
दूरस्थ शिक्षा को लेकर वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय स्तर पर संभावनाओं पर विचार किया गया था। इसके बाद योजना को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पाठ्यक्रमों के चयन, अध्ययन केंद्रों की व्यवस्था, शैक्षणिक संसाधनों और जरूरी अनुमोदनों को लेकर भी अब तक कोई स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में शुरुआती कवायद के बाद योजना की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं।
विश्वविद्यालय को नैक से ए ग्रेड मिलने के बाद दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार की संभावनाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा तथा ऑनलाइन कार्यक्रम संबंधी विनियम, 2020 में निर्धारित मानदंडों के अनुसार पात्र उच्च शिक्षण संस्थान इन कार्यक्रमों का संचालन कर सकते हैं।
नैक ग्रेडिंग अपने आप में पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति नहीं है। इसके लिए संबंधित नियामकीय शर्तों और आवश्यक अनुमोदनों का पालन करना अनिवार्य है। ऐसे में विश्वविद्यालय की ओर से पात्रता, अनुमोदन और पाठ्यक्रम संचालन की दिशा में हुई कार्रवाई स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
दूरस्थ शिक्षा शुरू होने से उन विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिल सकती है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक सीमाओं या नौकरी के कारण नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते। गृहणियों, नौकरीपेशा युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने गृह क्षेत्र में रहते हुए पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिल सकता है।
उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाने की मजबूरी भी कम हो सकती है। महाकोशल क्षेत्र में विश्वविद्यालय के व्यापक प्रभाव को देखते हुए यह पहल उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
वर्ष 2025 में शुरू हुई कवायद के बावजूद अब तक दूरस्थ शिक्षा प्रारंभ करने की दिशा में ठोस पहल सामने नहीं आने से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या योजना के लिए कोई समिति गठित की गई थी? यदि समिति बनी थी, तो उसकी अनुशंसाओं पर क्या कार्रवाई हुई?
किन पाठ्यक्रमों को शुरू करने पर विचार किया गया और आवश्यक अनुमोदनों के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई? विद्यार्थियों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय की समयबद्ध योजना क्या है? इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं।
विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का आकलन केवल नैक ग्रेडिंग से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और शिक्षा के नए अवसरों से भी होता है। ऐसे में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए जरूरी है कि वह दूरस्थ शिक्षा योजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करे और इसे शुरू करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना सामने लाए। अन्यथा, महाकौशल के विद्यार्थियों को घर बैठे उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की पहल फिलहाल योजना और चर्चाओं तक ही सीमित रहने की आशंका बनी रहेगी।
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