
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। देश में नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद विधि शिक्षा में भी बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारतीय दंड संहिता (आइपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) ने ली है।
पढ़ाई के साथ नई पुस्तकों, संदर्भ सामग्री और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को बदलती न्याय व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
विद्यार्थियों के लिए संबंधित पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। हाल ही में लेबर ला में हुए बदलावों को भी तत्काल पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। प्रो. राव के अनुसार, फैकल्टी सदस्य नए कानूनों का स्वयं अध्ययन करते हैं और उनके प्रावधानों की जानकारी विद्यार्थियों को कक्षाओं में देते हैं। इससे शिक्षण प्रक्रिया में नए कानूनी प्रावधानों को लगातार शामिल किया जा रहा है।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की विधि संकायाध्यक्ष प्रो. ममता राव ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों में बदलाव के साथ ही विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम में आवश्यक संशोधन किए हैं। विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में नए अधिनियमों के अनुरूप पढ़ाई कराई जा रही है।
धर्मशास्त्र नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. मनोज कुमार सिन्हा के अनुसार, नए आपराधिक कानून एक जुलाई 2024 से ही विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य नए कानूनों के प्रावधानों से अपडेट हैं।
कुछ सदस्यों ने इन कानूनों में सुधार के लिए गठित समितियों की बैठकों में भी भाग लिया है। नए कानूनों की समझ विकसित करने के लिए विश्वविद्यालय ने 23 और 24 दिसंबर 2024 को बूट कैंप आयोजित किया था। इसमें स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी के सदस्यों, शिक्षाविदों और अधिवक्ताओं ने रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया। इसके अलावा 15 से 23 नवंबर 2025 तक नए आपराधिक कानूनों और ड्राफ्टिंग पर एडवांस्ड सर्टिफिकेट कोर्स आयोजित किया गया।
नए कानूनों में अपराधों की परिभाषाओं, जांच प्रक्रिया और साक्ष्य संबंधी प्रविधानों को नया स्वरूप दिया गया है। ऐसे में विद्यार्थियों को कानूनी धाराओं के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देना भी विधि शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एफआईआर, जमानत आवेदन, आरोपपत्र, इलेक्ट्रानिक साक्ष्य और अदालती कार्यवाही जैसे विषयों की समझ भावी अधिवक्ताओं के लिए उपयोगी है।
विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम संशोधन, नई पुस्तकों की उपलब्धता, पुस्तकालयों को अपडेट करने और विशेष शैक्षणिक कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को नई न्याय व्यवस्था से परिचित कराया जा रहा है। इससे विधि शिक्षा को बदलते कानूनी प्रवििधानों के अनुरूप बनाने और भावी अधिवक्ताओं को नए न्यायिक परिवेश के लिए तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
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