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जबलपुर के शैल्बी अस्पताल का कमाल, कुछ घंटे के इलाज का बिल थमाया तीन लाख रुपये

परिवार का आरोप है कि बीमा की जानकारी मिलने के बाद डाॅक्टरों ने पेट की तकलीफ को हार्ट ब्लाक बताकर एंजियोप्लाॅस्टी-सर्जरी कर दी। इलाज के महज डेढ़ से दो ...और पढ़ें

By Alok BanerjeeEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 08:48:02 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 08:48:02 PM (IST)
जबलपुर के शैल्बी अस्पताल का कमाल, कुछ घंटे के इलाज का बिल थमाया तीन लाख रुपये
कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅॅ. आशीष तिवारी व अस्पताल प्रबंधन काॅल से बचता रहा। सौजन्‍य वीडियो ग्रैब

HighLights

  1. शैल्बी अस्पताल में महिला मरीज की मौत का मामला
  2. विभिन्न स्तरों पर शिकायत का मन बना लिया परिवार ने
  3. संचालक बोले- अस्पताल में रुकने का समय 4-5 घंटे ही रहा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। विजयनगर स्थित शैल्बी अस्पताल में 62 वर्षीय महिला मरीज भागवती पटेल की मौत के बाद स्वजनों ने इलाज में लापरवाही और भारी-भरकम बिल को लेकर अब अस्पताल पर विभिन्न स्तरों पर शिकायत का मन बना लिया है।

जितेंद्र कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं

फिलहाल मां के आकस्मिक निधन के बाद बेटे जितेंद्र कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन पटेल परिवार शैल्बी अस्पताल की करतूत को लेकर उसे हल्के में छोड़ने को भी तैयार नहीं है।

पेट दर्द की शिकायत पर चलकर अस्पताल पहुंची थीं

इस बीच जो अस्पताल से जुड़ी महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि पनागर के बिजोरा गांव की रहने वाली 62 वर्षीय भागवती पटेल पेट दर्द की शिकायत पर चलकर अस्पताल पहुंची थीं और साथ में बेटे सहित परिवार के अन्य सदस्य भी थे।


24 घंटे बीतने के बाद अस्पताल प्रशासन जागा

बुधवार की घटना के 24 घंटे बीतने के बाद अस्पताल प्रशासन जागा है और अपना पक्ष रखने सामने आया। वरना बुधवार रात तक कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ. आशीष तिवारी व अस्पताल प्रबंधन काॅल से बचता रहा।

शैल्बी अस्पताल के डिप्टी सीईओ अंकित जैन ने गुरुवार को अस्पताल का पक्ष सामने रखते हुए कहा कि 65 वर्षीय महिला गंभीर मेजर हार्ट अटैक के साथ अस्पताल की इमरजेंसी में आई थीं। आने के समय वह शाॅक की अवस्था में थीं। बीपी 70 एवं ब्राडीकार्डिया (धड़कन कम) में थीं।

उनका अस्पताल में रुकने का समय 4-5 घंटे ही रहा

डिप्टी सीईओ अंकित जैन ने बताया कि सभी प्रयास एवं इलाज करने के बाद भी मरीज को हार्ट अटैक की काॅम्प्लिकेशन से नहीं बचाया जा सका। उनका अस्पताल में रुकने का समय 4-5 घंटे ही रहा, जिससे हार्ट अटैक की व्यापकता एवं गंभीरता समझी जा सकती है। मरीज के मेजर हार्ट अटैक का ईसीजी, 100 प्रतिशत बंद नस का वीडियो, बीपी एवं धड़कन कम होने का रिकार्ड अस्पताल में उपलब्ध है।

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