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जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री बना रही है सेना की नई ताकत, एलएएमवी पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से लैस

फिलहाल सबकी नजर लेह ट्रायल की रिपोर्ट पर टिकी है। अगर वाहन सभी पैमानों पर खरा उतरता है, तो आने वाले दिनों में जबलपुर की यह फैक्ट्री एक बार फिर देश की रक्षा ताकत का पर्याय बन जाएगी।

By Alok BanerjeeEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 11:46:27 AM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 11:46:27 AM (IST)
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जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री बना रही है सेना की नई ताकत, एलएएमवी पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से लैस
ट्रायल सफल रहने पर जल्द ही इसके बल्क प्रोडक्शन को हरी झंडी मिल सकती है। सौजन्‍य फैक्ट्री

HighLights

  1. एलएएमवी एक हाई-मोबिलिटी 4x4 आर्मर्ड प्लेटफॉर्म है
  2. वाहन पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत की तकनीक पर आधारित
  3. युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । भारतीय सेना के लिए अगली पीढ़ी का हल्का बख्तरबंद वाहन अब जबलपुर में आकार ले रहा है। आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (एवीएनएल) की इकाई व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) ने स्वदेशी लाइट आर्म्ड मल्टीपरपज व्हीकल एलएएमवी विकसित किया है।

पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत की तकनीक पर आधारित

यह वाहन पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत की तकनीक पर आधारित है, इसके अधिकांश पार्ट्स स्वदेश में ही निर्मित हो रहे हैं। सेना की मांग पर इसे भविष्य के युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

लेह-लद्दाख में हो रहा है कठिन परीक्षण

फैक्ट्री सूत्रों के अनुसार एलएएमवी का फील्ड ट्रायल पिछले दिनों में लेह-लद्दाख के दुर्गम और अत्यंत ठंडे इलाकों में किया गया है। माइनस तापमान, पतली हवा, बर्फीली चढ़ाई और पथरीले रास्तों पर वाहन की क्षमता को परखा जा रहा है।


क्या है एलएएमवी की खासियत

एलएएमवी एक हाई-मोबिलिटी 4x4 आर्मर्ड प्लेटफॉर्म है। इसे ट्रूप ट्रांसपोर्ट, रिकॉनिसेंस मिशन और शहरी युद्ध (अर्बन वारफेयर) के लिए बनाया गया है।

  • इंजन: 450 बीएचपी का दमदार इंजन, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ
  • स्पीड: अधिकतम 100 किमी प्रति घंटा
  • पेलोड क्षमता: 1,500 किलोग्राम
  • क्रू: 2+2 यानी चालक सहित 4 जवान
  • दरवाजे:5 दरवाजे, ताकि युद्ध के दौरान तेजी से अंदर-बाहर निकला जा सके
  • सस्पेंशन: आगे और पीछे दोनों तरफ डबल विशबोन इंडिपेंडेंट सस्पेंशन, जिससे ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी स्थिरता बनी रहती है
  • ब्रेक: डुअल फेल-सेफ ब्रेक के साथ एबीएस, दुर्गम इलाकों में भी सुरक्षित

सुरक्षा ही सबसे बड़ी ताकत

एलएएमवी को एडवांस सर्वाइवल और बैटलफील्ड अनुकूलन के हिसाब से विकसित किया गया है। इसमें मॉड्यूलर बैलिस्टिक प्रोटेक्शन और अंडर-हल ब्लास्ट रेजिस्टेंस दिया गया है। यानी गोलियों के साथ-साथ जमीन में लगे बारूदी सुरंग / आइईडी ब्लास्ट से भी जवानों को सुरक्षा मिलेगी।

वाहन 7.62 एम एम तक की गोलियों को रोकने में सक्षम होगा

लेवल-1 प्रोटेक्शन से लैस यह वाहन 7.62 एम एम तक की गोलियों को रोकने में सक्षम होगा। इसमें रेडियो सेट, गोला-बारूद, रॉकेट लांचर और इंसास राइफल रखने के लिए पर्याप्त ऑनबोर्ड स्टोरेज है, जिससे जवान लंबी अवधि तक ऑपरेशन चला सकेंगे।

आत्मनिर्भर भारत की असली मिसाल

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर की स्थापना 1969 में हुई थी। शक्तिमान ट्रक, जोंगा और वाहन 1 टन से शुरू हुई फैक्ट्री आज स्टालियन, माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल और बुलेट प्रूफ व्हीकल बनाती है। एलएएमवी उसी विरासत का अगला कदम है।

स्थानीय एमएसएमई को भी काम मिलेगा

पहले भारत को ऐसे हल्के बख्तरबंद वाहनों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था, अब डिजाइन से लेकर आर्मर वेल्डिंग, प्लाज्मा कटिंग, लेजर कटिंग और गियर बॉक्स तक सब कुछ जबलपुर में ही हो रहा है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि स्थानीय एमएसएमई को भी काम मिलेगा।

सेना की रिकॉनिसेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी

एलएएमवी के आने से सेना की रिकॉनिसेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित इलाकों में त्वरित मूवमेंट, कम समय में टुकड़ियों को पहुंचाना और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा।

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