
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । भारतीय सेना के लिए अगली पीढ़ी का हल्का बख्तरबंद वाहन अब जबलपुर में आकार ले रहा है। आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (एवीएनएल) की इकाई व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) ने स्वदेशी लाइट आर्म्ड मल्टीपरपज व्हीकल एलएएमवी विकसित किया है।
यह वाहन पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत की तकनीक पर आधारित है, इसके अधिकांश पार्ट्स स्वदेश में ही निर्मित हो रहे हैं। सेना की मांग पर इसे भविष्य के युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
फैक्ट्री सूत्रों के अनुसार एलएएमवी का फील्ड ट्रायल पिछले दिनों में लेह-लद्दाख के दुर्गम और अत्यंत ठंडे इलाकों में किया गया है। माइनस तापमान, पतली हवा, बर्फीली चढ़ाई और पथरीले रास्तों पर वाहन की क्षमता को परखा जा रहा है।
एलएएमवी एक हाई-मोबिलिटी 4x4 आर्मर्ड प्लेटफॉर्म है। इसे ट्रूप ट्रांसपोर्ट, रिकॉनिसेंस मिशन और शहरी युद्ध (अर्बन वारफेयर) के लिए बनाया गया है।
एलएएमवी को एडवांस सर्वाइवल और बैटलफील्ड अनुकूलन के हिसाब से विकसित किया गया है। इसमें मॉड्यूलर बैलिस्टिक प्रोटेक्शन और अंडर-हल ब्लास्ट रेजिस्टेंस दिया गया है। यानी गोलियों के साथ-साथ जमीन में लगे बारूदी सुरंग / आइईडी ब्लास्ट से भी जवानों को सुरक्षा मिलेगी।
लेवल-1 प्रोटेक्शन से लैस यह वाहन 7.62 एम एम तक की गोलियों को रोकने में सक्षम होगा। इसमें रेडियो सेट, गोला-बारूद, रॉकेट लांचर और इंसास राइफल रखने के लिए पर्याप्त ऑनबोर्ड स्टोरेज है, जिससे जवान लंबी अवधि तक ऑपरेशन चला सकेंगे।
व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर की स्थापना 1969 में हुई थी। शक्तिमान ट्रक, जोंगा और वाहन 1 टन से शुरू हुई फैक्ट्री आज स्टालियन, माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल और बुलेट प्रूफ व्हीकल बनाती है। एलएएमवी उसी विरासत का अगला कदम है।
पहले भारत को ऐसे हल्के बख्तरबंद वाहनों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था, अब डिजाइन से लेकर आर्मर वेल्डिंग, प्लाज्मा कटिंग, लेजर कटिंग और गियर बॉक्स तक सब कुछ जबलपुर में ही हो रहा है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि स्थानीय एमएसएमई को भी काम मिलेगा।
एलएएमवी के आने से सेना की रिकॉनिसेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित इलाकों में त्वरित मूवमेंट, कम समय में टुकड़ियों को पहुंचाना और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा।
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