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अपने लिए जिए तो क्या जिए... जबलपुर हाई कोर्ट के रिटायर जज अवनींद्र सिंह करेंगे देहदान, PM Cares फंड को सौंपे ₹1.01 करोड़

अपने जीवन की कमाई और मृत्यु के बाद अपनी देह तक समाज को समर्पित करने के दो संकल्प सुनाए। फुल कोर्ट फेयरवेल में उनका यह कथन समारोह की सबसे भावुक स्मृति ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 09:35:39 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 09:35:39 PM (IST)
अपने लिए जिए तो क्या जिए... जबलपुर हाई कोर्ट के रिटायर जज अवनींद्र सिंह करेंगे देहदान, PM Cares फंड को सौंपे ₹1.01 करोड़
न्यायमूर्ति सिंह ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने दो दिन पूर्व मेडिकल काॅलेज, जबलपुर में देहदान के लिए पंजीयन कराया है।

HighLights

  1. पत्नी के साथ मेडिकल कालेज में कराया देहदान का पंजीयन
  2. जीपीएफ के 1.1 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री केयर्स फंड में देने का संकल्प
  3. दान का पक्ष व्यक्तित्व की संवेदनशीलता को अलग ढंग से रेखांकित कर गया

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। न्याय की दुनिया में 36 वर्ष से अधिक की यात्रा पूरी करने के बाद जब न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह विदा हुए तो उनके पास अपने लिए कुछ बचाकर रखने की इच्छा नहीं थी। उन्होंने कहा कि अपने लिए जिए तो क्या जिए।

देह मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में काम आएगी

न्यायमूर्ति सिंह ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने दो दिन पूर्व मेडिकल काॅलेज, जबलपुर में देहदान के लिए पंजीयन कराया है। उनका कहना था कि मृत्यु के बाद उनकी देह मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में काम आएगी।

मेरा शरीर किसी भावी चिकित्सक के ज्ञान का माध्यम बने

जिस शरीर ने जीवनभर न्यायिक दायित्व निभाया, वही शरीर जीवन के बाद किसी भावी चिकित्सक के ज्ञान का माध्यम बने, इससे बड़ी सामाजिक उपयोगिता और क्या होगी। इसके साथ ही उन्होंने अपने जीपीएफ में जमा एक करोड़ एक लाख रुपये प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दान करने की घोषणा की।


संकल्प समारोह में मौजूद लोगों को भीतर तक छू गया।

यह कहते हुए वे भावुक हो गए। जीवनभर की सेवा से अर्जित धन को अपने लिए सुरक्षित रखने के बजाय जरूरतमंदों और समाज के लिए समर्पित करने का उनका संकल्प समारोह में मौजूद लोगों को भीतर तक छू गया।

फैसलों से आगे याद रहेगा संवेदना का यह पक्ष

न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की न्यायिक पहचान उनके निर्णयों और न्यायिक दायित्वों से बनी, लेकिन सेवानिवृत्ति के अवसर पर सामने आया यह पक्ष उनके व्यक्तित्व की संवेदनशीलता को अलग ढंग से रेखांकित कर गया। उन्होंने कहा कि न्यायिक यात्रा में मिले अनुभव और लोगों का विश्वास हमेशा उनके साथ रहेगा।

न्यायिक दायित्व अकेले निभाया जाने वाला कार्य नहीं है

उन्होंने अपने कार्यालय के सभी कर्मचारियों के सहयोग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कहा कि न्यायिक दायित्व अकेले निभाया जाने वाला कार्य नहीं है। इसके पीछे सहयोगियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं की सामूहिक भूमिका रहती है।

नवागत मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे को शुभकामनाएं दीं

न्यायमूर्ति सिंह ने नवागत मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे को शुभकामनाएं दीं और उनके उच्च शिखर तक पहुंचने की कामना की। 31 मई 1990 को सिविल जज के रूप में न्यायिक सेवा शुरू करने वाले न्यायमूर्ति सिंह ने न्यायिक सेवा के विभिन्न पदों पर दायित्व निभाया।

न्यायिक यात्रा का औपचारिक समापन हुआ

एक मई 2023 को उन्होंने हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। करीब तीन वर्ष से अधिक के हाई कोर्ट कार्यकाल के बाद गुरुवार को फुल कोर्ट फेयरवेल के साथ उनकी न्यायिक यात्रा का औपचारिक समापन हुआ। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 38 रह गई है, जबकि स्वीकृत पद 53 हैं। यानी 15 पद रिक्त हैं।

लंबित मामलों की संख्या पौने पांच लाख से अधिक

विदाई में सामान्यतः स्मृतियां साथ जाती हैं, लेकिन न्यायमूर्ति सिंह ने अपनी विदाई में दो संकल्प छोड़ दिए-एक देह का, जो मृत्यु के बाद भी ज्ञान देगी और दूसरा धन का, जो जीवन के बाद भी सेवा करता रहेगा। लंबित मामलों की संख्या पौने पांच लाख से अधिक है।

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