
नईदुुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने 15 वर्ष लंबी कानूनी लड़ाई के बाद दिवंगत याचिकाकर्ता धैर्यमणि शर्मा के बच्चों को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने भूमि विवाद में मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 170-बी के तहत की गई कार्रवाई को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि दो अक्टूबर, 1959 से पहले हुए भूमि हस्तांतरण की जांच इस धारा के तहत नहीं की जा सकती।
न्यायमूर्ति संजीव एस. कलगांवकर की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए सिंगरौली जिले के चितरंगी के एसडीओ, कलेक्टर, रीवा के अतिरिक्त आयुक्त तथा राजस्व मंडल द्वारा पारित आदेशों को निरस्त कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा व अंजना श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। मामला सिंगरौली जिले की विवादित भूमि से संबंधित है।
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि वह वर्ष 1956 से भूमि पर काबिज है तथा उसी समय से राजस्व अभिलेखों में भूमिस्वामी के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद धनुकधारी सिंह गोंड एवं अन्य के आवेदन पर धारा 170-बी के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
एसडीओ चितरंगी ने नौ सितंबर, 2011 को कार्रवाई की वैधानिकता को लेकर उठाई गई आपत्ति खारिज कर दी थी। इसके बाद कलेक्टर, अतिरिक्त आयुक्त और राजस्व मंडल ने भी याचिकाकर्ता के विरुद्ध आदेश पारित किए।
हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 170-बी का दायरा केवल 2 अक्टूबर 1959 से 24 अक्टूबर, 1980 के बीच हुए भूमि हस्तांतरणों तक सीमित है। चूंकि इस मामले में याचिकाकर्ता वर्ष 1956 से भूमिस्वामी के रूप में दर्ज था, इसलिए राजस्व अधिकारियों को धारा 170-बी के तहत जांच शुरू करने का अधिकार ही नहीं था। कोर्ट ने पूरी कार्रवाई समाप्त कर दी।
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