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अवैध खनन मामले में भाजपा विधायक को हाई कोर्ट से राहत नहीं, 81.73 करोड़ की वसूली पर कलेक्टर करेंगे फैसला

मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के झींटी गांव में लगभग 27.05 हेक्टेयर क्षेत्र में लौह अयस्क और लेटेराइट के खनन से जुड़ा है।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 05:57:26 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 05:57:26 PM (IST)
अवैध खनन मामले में भाजपा विधायक को हाई कोर्ट से राहत नहीं, 81.73 करोड़ की वसूली पर कलेक्टर करेंगे फैसला
हाई कोर्ट ने कहा- फर्म की वास्तविक देनदारी पर अंतिम राय नहीं दी।

HighLights

  1. चार महीने के भीतर मामले का निराकरण किया जाए
  2. विचार करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना है
  3. कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाए

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी पार्टनरशिप फर्म पैसिफिक मिनरल्स एक्सपोर्ट को कथित अवैध उत्खनन के मामले में हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है।

याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी

झींटी गांव की लौह अयस्क खदान से जुड़े 81.73 करोड़ रुपये की प्रस्तावित वसूली की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है।

अंतिम देनदारी अभी तय नहीं हुई

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फर्म पर इतनी राशि की अंतिम देनदारी अभी तय नहीं हुई है। अब जबलपुर कलेक्टर को सुनवाई के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय लेना होगा।

चार महीने में निर्णय की अपेक्षा

न्यायमूर्ति विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने 13 अक्टूबर को फैसला सुनाया, जो 16 अक्टूबर को अपलोड हुआ। कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देशित किया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से अधिमानतः चार महीने के भीतर मामले का निराकरण किया जाए। फर्म को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देने और जांच रिपोर्ट, आपत्तियों तथा संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना है।

10.89 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खनन का आरोप

सरकारी जांच में वर्ष 2004 से 2017 के बीच की खनन गतिविधियों की पड़ताल की गई। जांच में 10 लाख 89 हजार 860 मीट्रिक टन लौह अयस्क के कथित अतिरिक्त या अवैध उत्खनन का मामला सामने आया। इसके आधार पर 81 करोड़ 73 लाख 95 हजार रुपये और जीएसटी जमा कराने की सिफारिश की गई थी।


फर्म ने उठाए जांच प्रक्रिया पर सवाल

फर्म की ओर से दलील दी गई कि जांच रिपोर्ट तैयार करने में प्रयुक्त दस्तावेज और गणना का आधार पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराया गया। फर्म ने यह भी कहा कि वह आवश्यक अनुमतियों के आधार पर खनन करती रही और रायल्टी सहित लागू शुल्क जमा करती रही।

कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाए

जांच समिति के गठन, प्रक्रिया तथा कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाए। वहीं, राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि अभी केवल कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और अंतिम वसूली आदेश पारित नहीं हुआ है।

हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इन्कार

युगलपीठ ने माना कि मध्य प्रदेश खनिज नियम, 2022 के तहत कलेक्टर को ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार है। चूंकि अभी सुनवाई की प्रक्रिया जारी है और अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है, इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं है। फर्म को पहले कलेक्टर के समक्ष अपनी आपत्तियां रखने को कहा गया।

फर्म की वास्तविक देनदारी पर अंतिम राय नहीं दी

अहम बात यह है कि 81.73 करोड़ रुपये की वसूली अभी तय नहीं हुई है। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर वसूली की कार्रवाई को चुनौती देने वाली मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन फर्म की वास्तविक देनदारी पर अंतिम राय नहीं दी। अब निगाहें जबलपुर कलेक्टर के निर्णय पर रहेंगी।

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