
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। संस्कारधानी की बेटी पूजा नागदेव, जो विवाह के बाद ज्योति श्यामदासानी के नाम से कानपुर में रह रही थीं, के बहुचर्चित हत्याकांड में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। उम्रकैद की सजा पाए पति पीयूष श्यामदासानी को अब तक सेंट्रल जेल नहीं भेजे जाने पर मृतका के पिता शंकर नागदेव ने जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नियमों के विपरीत पीयूष को विशेष संरक्षण दिया जा रहा है।
शंकर नागदेव का कहना है कि 20 अक्टूबर, 2022 को कानपुर की सत्र अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मामले के अन्य दोषियों को सेंट्रल जेल भेज दिया गया, लेकिन मुख्य दोषी पीयूष श्यामदासानी अब तक जिला जेल में ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में कई बार लिखित शिकायतें भी की गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ज्योति मूल रूप से जबलपुर की रहने वाली थीं। विवाह के बाद वह कानपुर चली गई थीं। 27 जुलाई 2014 की रात पीयूष उन्हें पार्वती बागला रोड स्थित एक रेस्टोरेंट ले गया। बाद में उसने पुलिस को झूठी कहानी सुनाई कि बदमाशों ने हमला कर उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया। लेकिन उसी रात पुलिस ने कल्याणपुर-पनकी रोड पर कार से ज्योति का शव बरामद किया। जांच में सामने आया कि उनकी चाकुओं से गोदकर हत्या की गई थी।
इस मामले में पीयूष श्यामदासानी सहित छह लोगों को आरोपी बनाया गया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पीयूष समेत अन्य आरोपितों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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जेल अधीक्षक राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि सात वर्ष से अधिक की सजा पाने वाले बंदियों को सामान्यतः सेंट्रल जेल भेजा जाता है, लेकिन यदि किसी कैदी के अन्य प्रकरण लंबित हों तो स्थानांतरण तत्काल नहीं किया जाता। इसी कारण पीयूष को अभी सेंट्रल जेल नहीं भेजा गया है।
उल्लेखनीय है कि जबलपुर की बेटी पूजा उर्फ ज्योति नागदेव की हत्या ने उस समय पूरे देश को झकझोर दिया था। अब एक बार फिर यह मामला मुख्य दोषी के जेल स्थानांतरण को लेकर चर्चा में है।