
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाईकोर्ट की वीडियो कान्फ्रेंसिंग से होने वाली सुनवाई का फर्जी वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने वाले युवक को सिंगरौली की बैढ़न पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सिंगरौली के पिपराझापी निवासी अमित तिवारी फर्जी सुनवाई का माहौल तैयार कर खुद को अधिवक्ता की तरह पेश करता था। वह हिंदी और अंग्रेजी में दलील करते हुए वीडियो बनवाता और उसे इंटरनेट मीडिया पर अपलोड करता था। लाइक और व्यू बढ़ाने के लिए बनाए गए इन वीडियो में आपत्तिजनक बातें भी कही गई थीं।
मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में पहुंचने के बाद कार्रवाई शुरू हुई। छह जुलाई को हाईकोर्ट ने जबलपुर आइजी को पत्र भेजकर प्रकरण में कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद सिविल लाइंस पुलिस ने जांच कर आरोपित की पहचान की और बीएनएस तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं में शून्य पर एफआइआर दर्ज की। प्रकरण सिंगरौली पुलिस को भेजे जाने के बाद बैढ़न पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जब अमित के घर पहुंची तो वहां एक कमरा देखकर चौंक गई। कमरे को अधिवक्ता के चैंबर की शक्ल में तैयार किया गया था। एक तरफ लैपटाप, डेस्कटाप रखा था साथ ही कानून की किताबें भी जमाकर रखी थीं। इसी सेटअप के सामने बैठकर अमित वीडियो बनाता था। उसके साथी वीडियो शूट करने में मदद करते थे। पुलिस के अनुसार वीडियो इस तरह तैयार किए जाते थे कि देखने वाले को वह वास्तविक न्यायालयीन सुनवाई का हिस्सा लगे।
अमित अधिवक्ता की तरह दलील करता और फिर तैयार वीडियो को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर देता था। कमरे में जज की स्क्रीन भी लगा रखी थी। आरोपित की एलएलबी की पढ़ाई अधूरी रह गई पर पर दूसरों के सामने स्वयं को वकील जैसा प्रस्तुत करता था।
जांच में यह भी सामने आया कि अमित वीडियो में बोलने वाली दलीलों की स्क्रिप्ट एआइ की मदद से तैयार करता था। अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए उसने एक्स पर ‘आवेश तिवारी’ नाम से अकाउंट बना रखा था। फर्जी वीडियो इसी अकाउंट से पोस्ट किए जाते थे। ‘प्रचंड प्रहार’ नाम के फेसबुक पेज पर भी वीडियो अपलोड किए गए। पुलिस जांच में अमित के खिलाफ उत्तर प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम से संबंधित एक प्रकरण दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब उसके इंटरनेट मीडिया अकाउंट, वीडियो और जब्त इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच कर रही है।