मध्य प्रदेश में कानून विभाग के प्रमुख सचिव का पद खाली, हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने राज्य शासन के मुख्य सचिव से शपथ पत्र प्रस्तुत कर स्पष्टीकरण मांगा है।
Publish Date: Sat, 31 Oct 2026 11:01:55 PM (IST)Updated Date: Sat, 31 Oct 2026 11:01:55 PM (IST)
जबलपुर हाई कोर्ट, फाइल फोटोHighLights
- विधि विभाग में प्रमुख सचिव का पद रिक्त
- पद रिक्त रहने पर हाई कोर्ट का सवाल
- मुख्य सचिव से पत्र के माध्यम से मांगा जवाब
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने विधि विभाग में प्रमुख सचिव का पद लंबे समय से रिक्त रहने पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य शासन के मुख्य सचिव से शपथ पत्र प्रस्तुत कर स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया तो प्रतिकूल आदेश पारित किए जा सकते हैं।
राज्य शासन बनाम सुभाष शुक्ला प्रकरण में दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने शासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। न्यायालय ने कहा कि एक ओर उसके आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी ओर विधि विभाग में प्रमुख सचिव का पद भी लंबे समय से रिक्त है।
न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य शासन के पास सरकारी अधिवक्ताओं की लंबी सूची होने के बावजूद पुनरीक्षण याचिकाएं निजी अधिवक्ता के माध्यम से क्यों दायर की जा रही हैं। इस संबंध में श्रम विभाग के अवर सचिव की ओर से अपेक्षित शपथ पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया था।
हाई कोर्ट ने सरकार को दिया समय
न्यायालय ने राज्य शासन को 14 अक्टूबर, 2026 के आदेश का पालन करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया। साथ ही निर्देश दिया कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होता है तो श्रम विभाग के अवर सचिव को अगली सुनवाई पर न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।
न्यायालय ने विधि विभाग में प्रमुख सचिव की नियुक्ति नहीं होने के कारणों को स्पष्ट करने के लिए मुख्य सचिव से शपथ पत्र मांगा है। आदेश की प्रति आवश्यक अनुपालन के लिए मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। अगली सुनवाई तीन नवंबर को नियत की गई है।