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करोड़ों के धान घोटाले के तार पूरे मध्‍य प्रदेश में, हाई कोर्ट ने दिए राज्य स्तरीय जांच के आदेश

तर्कों से सहमत होते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि धान...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 14 Aug 2026 12:57:27 PM (IST)Updated Date: Fri, 14 Aug 2026 01:50:58 PM (IST)
करोड़ों के धान घोटाले के तार पूरे मध्‍य प्रदेश में, हाई कोर्ट ने दिए राज्य स्तरीय जांच के आदेश
मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी में कुछ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की गई, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

HighLights

  1. जबलपुर में कलेक्टर की सतर्कता से पकड़ा गया था घोटाला
  2. 27 जिलों में जांच के आदेश से सामने आई गड़बड़ी की व्यापकता
  3. नागरिक उपभोक्ता मंच के पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव की जनहित याचिका पर सुनवाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर में कलेक्टर की सतर्कता से सामने आए करोड़ों रुपये के धान परिवहन घोटाले के तार पूरे प्रदेश से जुड़े होने की आशंका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। नागरिक उपभोक्ता मंच के पीजी नाजपांडे एवं रजत भार्गव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने प्रदेश स्तर पर धान परिवहन घोटाले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार की ओर से दूसरे जिलों में व्यापक कार्रवाई नहीं की

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि जबलपुर में जिस तरह धान परिवहन में गड़बड़ी पकड़ी गई, उससे साफ है कि इसके तार प्रदेश के अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से दूसरे जिलों में व्यापक कार्रवाई नहीं की गई। मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी में कुछ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की गई, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।


27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश :

अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार स्वयं प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दे चुकी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल जबलपुर तक सीमित नहीं है और धान परिवहन में प्रदेश स्तर पर गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सिविल सप्लाईज कारपोरेशन से शपथपत्र तलब :

हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाईज कारपोरेशन को शपथपत्र प्रस्तुत कर यह बताने के निर्देश दिए हैं कि जबलपुर कलेक्टर द्वारा घोटाला पकड़े जाने के बाद निगम ने प्रदेश स्तर पर क्या कार्रवाई की। कोर्ट ने अब तक की गई जांच और कार्रवाई का पूरा विवरण भी मांगा है।

ईओडब्ल्यू भी पेश करेगा स्टेटस रिपोर्ट :

मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को भी हाई कोर्ट ने निर्देशित किया है कि धान परिवहन घोटाले से संबंधित जांच और अब तक की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए।

जबलपुर कलेक्टर सतर्क नहीं होते तो घोटाला नहीं खुलता

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि यदि जबलपुर कलेक्टर सतर्क नहीं होते तो यह घोटाला सामने नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि इसी तरह दूसरे जिलों के कलेक्टरों को भी अपने स्तर पर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

गड़बड़ी अब पूरे प्रदेश की जांच का आधार बन गई

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब धान परिवहन से जुड़े रिकार्ड, वाहनों की वास्तविक क्षमता, परिवहन दस्तावेज, भुगतान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की प्रदेशभर में जांच का रास्ता साफ हो गया है। जबलपुर में पकड़ी गई गड़बड़ी अब पूरे प्रदेश की जांच का आधार बन गई है।

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