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जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे की झांकी में विराजे गणपति, मृत मिली मां-बेटे की याद ने झकझोरा

स्थानीय घटना, प्रकृति, सामूहिक सहभागिता और सामाजिक संवेदना-सब गणपति उत्सव की कथा का हिस्सा बन रहे हैं। हादसे के बाद सामने आई सबसे झकझोर देने वाली तस्व...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 07:15:55 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 07:15:55 PM (IST)
जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे की झांकी में विराजे गणपति, मृत मिली मां-बेटे की याद ने झकझोरा
शहर की उखरी रोड स्थि‍त स्‍टेट बैंक कालोनी में विराजे गणेश जी। नईदुनिया

HighLights

  1. जबलपुर के पंडालों की अपनी कहानी
  2. रचनात्मकता के मंच बनते दिखाई दे रहे
  3. झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी है

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। संस्कारधानी में गणेशोत्सव के पंडाल इस बार पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय स्मृतियों, सामाजिक सरोकारों और रचनात्मकता के मंच बनते दिखाई दे रहे हैं। ऐसी ही एक झांकी 30 अप्रैल को जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत और 28 पर्यटकों के बचने की घटना की है।

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बच्चे को सीने से लगाए मृत मिली थी मां

30 अप्रैल को जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत और 28 पर्यटकों के बचने की घटना आज भी लोगों के जेहन में है। हादसे के बाद सामने आई सबसे झकझोर देने वाली तस्वीर मां-बेटे की थी, जिसमें मां अपने बच्चे को सीने से लगाए मृत मिली थी।


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कल्पना को साकार कर माटी के गणपति विराजे

माटी के गणेश का संदेश अब केवल प्रतिमा तक सीमित नहीं है। कहीं हाल की घटना को झांकी के माध्यम से याद किया गया है तो कहीं प्राकृतिक गुफा की कल्पना को साकार कर उसके मध्य माटी के गणपति विराजे हैं। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारी लगातार 11वें वर्ष माटी के गणेश स्थापित कर इस अभियान को परंपरा में बदलने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। इन प्रयासों में एक बात साझा है-गणपति माटी के हैं और उनके आसपास की कथा अपनी मिट्टी से जुड़ी है।

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बरगी डेम हादसे की झांकी में माटी के गणपति

भूकंप कालोनी, गंगानगर निवासी आदर्श कुमार ने इस बार गणेशोत्सव को स्थानीय स्मृति से जोड़ा है। उन्होंने बरगी डेम क्रूज हादसे की झांकी तैयार की है और इसी के मध्य माटी के गणपति को विराजित किया है। झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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स्मरण करने वाली प्रस्तुति संदेश भी

गणेश प्रतिमा के साथ घटना को स्मरण करने वाली प्रस्तुति यह संदेश भी देती है कि उत्सव केवल सजावट और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर भी हो सकता है।

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विश्वविद्यालय कर्मियों की अपनी परंपर

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने माटी के गणेश स्थापित करने का संकल्प लगातार 11वें वर्ष भी निभाया है। कर्मचारियों की समिति ने आयोजन की अलग-अलग जिम्मेदारियां पहले ही बांट दी हैं।

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सामूहिक सहभागिता से बनी ऐसी परंपरा

पूजन से लेकर भंडारा और प्रसाद वितरण तक की व्यवस्थाएं कर्मचारी मिलकर संभाल रहे हैं। यहां माटी के गणेश अब एक वर्ष का अभियान नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता से बनी ऐसी परंपरा हैं, जिसे कर्मचारी हर साल आगे बढ़ा रहे हैं।

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प्राकृतिक गुफा के बीच सजे गणपति

संस्कारधानी निवासी राजेश दलवी ने भी गणेशोत्सव में प्रकृति को केंद्र में रखा है। उनके 17 वर्षीय क्रियेटिव पुत्र मयूर दलवी ने प्राकृतिक गुफा की झांकी तैयार की है। इसी गुफा के मध्य माटी के गणेश विराजमान हैं।

श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा प्रकृति का स्वरूप

कृत्रिम सजावट के बीच प्रकृति का स्वरूप देने वाली यह प्रस्तुति श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। माटी की प्रतिमा और गुफा की थीम मिलकर गणेशोत्सव को पर्यावरण के करीब ले जाती दिखाई देती है।

अब पंडाल सिर्फ पंडाल नहीं

इन उदाहरणों में गणेशोत्सव का एक नया कलेवर दिखाई देता है। माटी के गणेश अभियान ने प्रतिमा के माध्यम से पर्यावरण की बात उठाई, लेकिन अब पंडालों की रचनात्मकता उस संदेश को और विस्तार दे रही है।

स्मृतियों और अपनी संवेदनाओं से जोड़ा जाता

संस्कारधानी की यही विशेषता है कि यहां उत्सव केवल मनाया नहीं जाता, उसे अपनी मिट्टी, अपनी स्मृतियों और अपनी संवेदनाओं से जोड़ा जाता है। माटी के गणेश इसी परंपरा को इस बार एक कदम और आगे ले जाते नजर आ रहे हैं।

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