
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायकों के स्थानांतरण को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए राज्य शासन को निर्देश दिया है कि स्थानांतरण की स्थिति में कर्मचारियों को निर्धारित यात्रा भत्ते और अन्य अनुमन्य सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह माह के भीतर इस संबंध में सुव्यवस्थित नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
सिंगरौली निवासी अमित कुमार मिश्रा, शहडोल के शिवाकांत मिश्रा व राजेश कुमार, सागर के रानू राजपूत और टीकमगढ़ के अभिषेक पटेरिया ने 18 जुलाई 2025 को संयुक्त याचिका दायर की थी। न्यायालय ने 14 अक्टूबर को निर्णय सुरक्षित रखने के बाद अपना फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि ग्राम रोजगार सहायकों को लगभग 18 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है। ऐसे में मूल कार्यस्थल से 100 किलोमीटर दूर पदस्थ किए जाने पर यात्रा और आवास का अतिरिक्त खर्च उठाना कठिन हो जाता है। कोर्ट ने स्थानांतरण पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की।
हालांकि, स्थानांतरण की स्थिति में कंपलसरी ट्रैवलिंग अलाउंस, यात्रा भत्ता और डोमेस्टिक अलाउंस सहित नियमानुसार देय सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
आदेश में आवास किराया भत्ता और स्थानांतरण व्यय की भरपाई के लिए भी प्रशासनिक प्रविधान किए जाने का उल्लेख है। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों की सेवा शर्तों और स्थानांतरण नीति को लेकर महत्वपूर्ण पहल हुई है।
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