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सड़क पर सुरक्षा के नाम पर झटका, अमानक स्पीड ब्रेकरों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट सख्त

Speed Breaker Accident: मध्य प्रदेश में सड़क पर रफ्तार रोकने के लिए बने स्पीड ब्रेकर खुद हादसे की वजह बन रहे हैं।

By Surendra DubeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 12:45:37 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 12:52:57 PM (IST)
सड़क पर सुरक्षा के नाम पर झटका, अमानक स्पीड ब्रेकरों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट सख्त
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर। - फाइल फोटो

HighLights

  1. जनहित याचिका में आरोप-बिना अनुमति बन रहे ब्रेकर
  2. रीढ़ और वाहनों पर पड़ रहा असर, केंद्र-राज्य से जवाब
  3. सुरक्षा उपकरण के बजाय जोखिम का कारण बन गए हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सड़क पर रफ्तार नियंत्रित करने के लिए बनाए गए स्पीड ब्रेकर यदि नियमों के मुताबिक न हों तो वे खुद हादसे का कारण बन सकते हैं। इसी गंभीर मुद्दे को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष जनहित याचिका के जरिए उठाया गया है। जनहित याचिका में प्रदेशभर में नियमों के विपरीत बनाए गए स्पीड ब्रेकरों को हटाने और भविष्य में निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग की गई है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को होगी।

जहां जरूरत नहीं, वहां भी बना दिए ब्रेकर

जबलपुर के गंगानगर निवासी अधिवक्ता कार्तिकेय लखेरा की जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में कई जगह निजी व्यक्तियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य संस्थाओं ने सक्षम अनुमति के बिना स्पीड ब्रेकर बना दिए हैं।

इनका आकार, ऊंचाई और डिजाइन मनमाना होने का दावा किया गया है। जनहित याचिका में कहा गया है कि सड़क सुरक्षा के लिए बनाए जाने वाले स्पीड ब्रेकर यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हों तो वे सुरक्षा उपकरण के बजाय जोखिम का कारण बन जाते हैं।


सरकारी एजेंसियों के ब्रेकर भी सवालों के घेरे में

जनहित याचिका का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सवाल केवल निजी तौर पर बनाए गए ब्रेकरों पर नहीं उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने सरकारी एजेंसियों द्वारा बनाए गए कई स्पीड ब्रेकरों के मानकों पर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर ऊंचाई, चौड़ाई, डिजाइन, मार्किंग और दृश्यता जैसे आवश्यक सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है।

वाहन टूट रहे, शरीर पर भी असर

जनहित याचिका में दावा किया गया है कि अत्यधिक ऊंचाई और गलत डिजाइन वाले स्पीड ब्रेकरों से वाहन चालकों को अचानक झटका लगता है। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों को नुकसान पहुंचने के साथ लोगों को शारीरिक परेशानी भी हो रही है। गंभीर मामलों में रीढ़ की हड्डी से संबंधित चोटों की आशंका भी जताई गई है।

इमरजेंसी वाहन फंसने का भी दावा

जनहित याचिका में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं पर पड़ने वाले असर को भी रेखांकित किया गया है। कहा गया है कि ऊंचे और गलत तरीके से बनाए गए स्पीड ब्रेकरों के कारण इन वाहनों को गति कम करनी पड़ती है, जिससे आपात स्थिति में घटनास्थल या अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती है।

जनहित में नियमों के पालन की मांग

याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश मोटर यान नियम, 1994 के नियम 219 और इंडियन रोड्स कांग्रेस की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा है कि स्पीड ब्रेकर निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही बनाए जाने चाहिए। हाई कोर्ट से प्रदेशभर में अमानक स्पीड ब्रेकरों का सर्वे कराकर उन्हें हटाने और भविष्य में नियमों के मुताबिक ही निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है। हाई कोर्ट के नोटिस के बाद अब सरकार के जवाब पर सभी की नजर है।

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