मध्य प्रदेश में NGT की स्टोन क्रशर इकाइयों पर सख्ती, आबादी; मंदिर और सरकारी निर्माण से 500 मीटर में संचालन पर रोक
मध्य प्रदेश में स्टोन क्रशर इकाइयों के संचालन और पर्यावरणीय मानकों को लेकर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है।
Publish Date: Sat, 03 Oct 2026 09:02:53 AM (IST)Updated Date: Sat, 03 Oct 2026 09:02:53 AM (IST)
फाइल फोटोHighLights
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण, एनजीटी का सख्त रुख
- दायरे में संचालित संयंत्रों को बंद करना होगा
- बिजली खपत का रिकॉर्ड मिलान करना होगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में स्टोन क्रशर इकाइयों के संचालन और पर्यावरणीय मानकों को लेकर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने क्रशर इकाइयों के वास्तविक उत्पादन की निगरानी के लिए बिजली खपत को आधार बनाने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बिजली वितरण कंपनियों से क्रशर इकाइयों की मासिक बिजली खपत का रिकॉर्ड लेकर मशीनरी की क्षमता और ऊर्जा खपत से उसका मिलान करना होगा। इससे कागजों में दर्शाए जा रहे उत्पादन और वास्तविक उत्पादन के बीच अंतर की जांच की जा सकेगी।
क्रशर इकाइयों पर कार्रवाई के निर्देश
आबादी, स्कूल और मंदिर आदि संवेदनशील स्थानों से 500 मीटर की परिधि में संचालित क्रशर इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बिना वैध पर्यावरणीय अनुमति और कन्सेंट टू एस्टेब्लिश व कन्सेंट टू ऑपरेट के संचालित इकाइयों को बंद या सील किया जा सकेगा। भू-जल का उपयोग करने वाली इकाइयों को केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की एनओसी लेना भी जरूरी होगा।
एनजीटी ने क्रशर क्षेत्रों में पीएम-10 और पीएम-2.5 की निगरानी, धूल नियंत्रण के लिए पानी के छिड़काव, सामग्री को ढंककर रखने, कन्वेयर बेल्ट पर मिस्ट स्प्रे तथा पांच मीटर चौड़ी हरित पट्टी विकसित करने जैसे उपायों पर भी जोर दिया है।
खनिज विभाग के पोर्टल और ई-ट्रांजिट पास व्यवस्था से उत्पादन संबंधी जानकारी को जोड़ने से खनन, परिवहन और क्रशर संचालन के आंकड़ों का आपसी मिलान किया जा सकेगा।