
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । हाई कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग और करोड़ों रुपये के कथित फर्जी लेनदेन से जुड़े मामले में कटनी पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की एकलपीठ ने करोड़ों रुपये के मनी ट्रेल के बावजूद संबंधित मुख्य लोगों से पूछताछ नहीं किए जाने पर हैरानी जताई।
आरोप है कि कटनी कंप्यूटर्स के कर्मचारी ओमप्रकाश के पहचान संबंधी दस्तावेज और चेक लेकर कटनी काम्प नाम से फर्म और बैंक खाता खोला गया। बाद में इसी खाते का इस्तेमाल आनलाइन गेमिंग से जुड़े बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किए जाने का आरोप है।
पुलिस ने मामले में योगेश बजाज सहित अन्य लोगों को आरोपित बनाया था। कोर्ट के सामने पेश बैंक रिकॉर्ड में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े करीब 11.94 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला। यह रकम कटनी कंप्यूटर्स के मालिक विजय बहरवानी और उनके कर्मचारियों के बैंक खातों में पहुंची थी। इसके बावजूद जांच की दिशा को लेकर हाई कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए।
कोर्ट ने गौर किया कि करोड़ों रुपये का लेनदेन सामने आने के बावजूद चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस ने न तो कटनी कंप्यूटर्स के मालिक का बयान दर्ज किया और न उन कर्मचारियों से पूछताछ की, जिनके खातों में बड़ी रकम पहुंची थी। हाई कोर्ट ने इसे जांच की गंभीर कमी माना।
हाई कोर्ट ने कहा कि जांच में ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी रकम में से कोई राशि योगेश बजाज के बैंक खाते में गई थी। उपलब्ध जांच सामग्री को देखते हुए अदालत ने उनकी हिरासत और भूमिका पर विचार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर भी हैरानी जताई कि पुलिस ने पहले चार्जशीट दाखिल की और उसके बाद आगे की जांच की अनुमति मांगी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब बैंक स्टेटमेंट पहले से जांच एजेंसी के पास उपलब्ध थे, तो समय रहते संबंधित लोगों से पूछताछ और मनी ट्रेल की पड़ताल क्यों नहीं की गई।
जांच में सामने आई कमियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने डीजीपी को मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी। हाई कोर्ट की टिप्पणियों के बाद 11.94 करोड़ रुपए के वास्तविक मनी ट्रेल और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण हो गई है।