
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति दीपक खोत की युगलपीठ ने नए कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि में वेतन कटौती को अवैध ठहराया। कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 12 दिसंबर, 2019 को जारी उस सर्कुलर को निरस्त कर दिया, जिसके तहत प्रोबेशन पीरियड के दौरान कर्मचारियों के वेतन कटौती का प्रविधान किया गया था।
हाई कोर्ट ने साफ किया कि प्रोबेशन काल के दौरान कर्मचारी को पूर्ण (शत प्रतिशत) वेतन देना होगा। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी का प्रोबेशन के दौरान वेतन काटा गया है, तो उसका भुगतान करें।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सरकार कर्मचारियों से 100 प्रतिशत काम ले रही है तो आखिर उनका वेतन कैसे काटा जा सकता है।याचिकाकर्ता छिंदवाड़ा निवासी आदित्य मिश्रा सहित कई जिलों के कर्मचारियों ने याचिका दायर कर प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन कटौता को चुनौती दी थी।
याचिकाओं में कहा गया कि शासन के उक्त परिपत्र में प्रविधान है कि सरकार की नई भर्तियों में कर्मचारियों को पहले साल 70 प्रतिशत, दूसरे साल 80 और तीसरे साल 90 प्रतिशत वेतन दिया जाएगा। चौथे वर्ष से नियमित होने पर ही कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया जाएगा।
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत प्रोबेशन पर भी लागू होगा। अदालत ने साफ किया कि नियमित काम लेने पर कर्मचारियों को पूरा न्यूनतम वेतन देना होगा। कोर्ट ने वेतन से की गई सभी रिकवरी को भी अवैध ठहराया। कहा कि उन सभी कर्मचारियों को वेतन कटौती की राशि एरियर्स के रूप में वापस करें जो उनकी सैलरी से प्रोबेशन पीरियड में काटी गई थी।