
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने बस चालक के ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर दायर न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की अपील निरस्त करते हुए 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान बस का वास्तविक वजन पूछा, लेकिन बीमा कंपनी के पास इसका प्रमाण नहीं था।
इस पर न्यायमूर्ति ने स्वयं गूगल पर टाटा स्टारबस मार्कोपोलो का वजन देखा, जो लगभग 4960 किलोग्राम निकला। कोर्ट ने कहा कि निर्धारित वजन सीमा के भीतर आने वाले वाहन के लिए केवल बस होने के आधार पर भारी मोटर वाहन का लाइसेंस अनिवार्य नहीं माना जा सकता।
यह मामला पनागर में 26 अगस्त 2022 को बस की टक्कर से घायल हुए शुभम पटेल से जुड़ा है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने पीड़ित को 3.17 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि चालक के पास हल्के मोटर वाहन का लाइसेंस था, जबकि बस चलाने के लिए भारी मोटर वाहन का लाइसेंस जरूरी था।
हाई कोर्ट ने पाया कि कंपनी वाहन का वजन निर्धारित सीमा से अधिक होने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। अधिकरण के समक्ष भी कंपनी ने कोई गवाह पेश नहीं किया था। कोर्ट ने पर्याप्त तथ्यों और कानूनी शोध के बिना अपील दायर करने पर नाराजगी जताते हुए 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च दावेदारों को देने तथा इसकी वसूली जिम्मेदार अधिकारियों से करने के निर्देश दिए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर अधिकरण द्वारा लगाया गया 12 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज निरस्त कर दिया गया।
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