
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि राज्य शासन द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर से सेवानिवृत्त प्राध्यापकों को भी पूरी ग्रेच्युटी और सातवें वेतनमान के अनुसार पेंशन का लाभ दिया जाए।
इस मत के साथ विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को डीसीआरजी (ग्रेच्युटी) की शेष 10 लाख रुपये की राशि का भुगतान करें। साथ ही सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार उनकी पेंशन पुन: निर्धारित कर भुगतान सुनिश्चित करें।
याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी डॉ. एमएलवी राव की ओर से याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय शंकर रायजादा व अमित रायजादा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि राज्य शासन के परिपत्रों के अनुसार याचिकाकर्ता को अधिकतम 20 लाख रुपये की डीसीआरजी (ग्रेच्युटी) राशि का लाभ दिया जाना चाहिए था। उन्हें केवल ग्रेच्युटी के रूप में 10 लाख रुपये व छठे वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार पेंशन दी जा रही है।
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राज्य शासन द्वारा जारी परिपत्रों के अनुसार सातवें वेतन आयोग की सिफारिश विश्वविद्यालयों पर लागू की जा चुकी है, इसलिए विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बढ़ी हुई ग्रेच्युटी व संशोधित पेंशन का लाभ दिया जाना अनिवार्य है।