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MP हाई कोर्ट ने छिंदवाड़ा SP के खिलाफ जारी किया गैर-जमानती वारंट, 1 अक्टूबर को कोर्ट में पेशी का आदेश

हाई कोर्ट ने अवमानना प्रकरण में आदेश के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने और नोटिस मिलने के बावजूद न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं होने पर छिंदवाड़ा क...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 09:20:53 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 09:20:53 PM (IST)
MP हाई कोर्ट ने छिंदवाड़ा SP के खिलाफ जारी किया गैर-जमानती वारंट, 1 अक्टूबर को कोर्ट में पेशी का आदेश
MP हाई कोर्ट ने छिंदवाड़ा SP के खिलाफ जारी किया गैर-जमानती वारंट

HighLights

  1. कोर्ट के आदेश और नोटिस की अनदेखी पर HC का सख्त रुख
  2. छिंदवाड़ा SP अजय पांडे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी
  3. जबलपुर IG के जरिए 1 अक्टूबर 2026 को कोर्ट में पेशी का आदेश

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने अवमानना प्रकरण में आदेश के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने और नोटिस मिलने के बावजूद न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं होने पर छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अजय पांडे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने एसपी को एक अक्टूबर 2026 को हाई कोर्ट के समक्ष पेश कराने के निर्देश दिए हैं। वारंट की तामीली आईजी पुलिस, जबलपुर के माध्यम से कराने को कहा गया है।

क्या है पूरा मामला: मृतक पुलिसकर्मी की पत्नी की याचिका पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख

यह मामला सुहागी जबलपुर निवासी सीता तिवारी की अवमानना याचिका से संबंधित है, जिनकी ओर से अधिवक्ता सचिन पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अवमानना याचिकाकर्ता के पति संतोष पांडे छिंदवाड़ा में पुलिसकर्मी थे। सेवानिवृत्ति उपरांत उनका निधन हो गया। इसके बावजूद दो लाख 24 हजार की रिकवरी निकाली गई। जिसके विरुद्ध हाई कोर्ट से राहतकारी आदेश पारित हो गया। लेकिन विभाग ने पालन नहीं किया। इसीलिए अवमानना याचिका दायर की गई है।


अधिकारियों के रवैये को कोर्ट ने बताया 'अत्यंत निंदनीय'

कोर्ट ने कहा कि छह नवंबर 2025 को अवमानना नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अब तक आदेश के पालन की रिपोर्ट पेश नहीं की गई। रिकॉर्ड के अनुसार एसपी छिंदवाड़ा ने 11 फरवरी 2026 को गृह विभाग के अवर सचिव को पत्र लिखकर अवमानना याचिका का नोटिस प्राप्त होने तथा आवश्यक मंजूरी के लिए विभाग को पत्र भेजे जाने की जानकारी दी थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि एसपी और संबंधित अधिकारी अवमानना प्रकरण के लंबित होने से परिचित थे। इसके बावजूद रजिस्ट्रार को केवल नोटिस प्राप्त होने की सूचना देना पर्याप्त समझा गया। न अधिवक्ता नियुक्त किया गया और न ही पालन रिपोर्ट पेश की गई।

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कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये को अत्यंत निंदनीय बताते हुए कहा कि यह आदेश का पालन नहीं करने और अवमानना नोटिस के बावजूद न्यायालय में उपस्थित नहीं होने की हठधर्मिता दर्शाता है। परिस्थितियों से ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी ने जानबूझकर अवमानना क्षेत्राधिकार से बचने का प्रयास किया। इन्हीं आधारों पर गैर-जमानती वारंट जारी किया गया।