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हाई कोर्ट में राज्य सरकार का आरोप, जांच में सहयोग नहीं कर रहीं नेहा पच्चीसिया, विदेश जाने की तैयारी में

कोर्ट ने कहा कि राज्य का जवाब मिलने के बाद ही अंतरिम और अंतिम राहत पर विचार किया जाएगा। बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी से जुड़े तर्क को देखते हुए मामल...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 05:18:49 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 05:18:49 PM (IST)
हाई कोर्ट में राज्य सरकार का आरोप, जांच में सहयोग नहीं कर रहीं नेहा पच्चीसिया, विदेश जाने की तैयारी में
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने कहा कि नेहा को झूठा फंसाया गया है।

HighLights

  1. लुकआउट सर्कुलर की कार्रवाई का हवाला
  2. सहआरोपितों से मिलीभगत का भी आरोप
  3. कोर्ट ने फिलहाल नहीं दी अंतरिम राहत

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हत्या के आरोपित को बचाने का झांसा देकर एक करोड़ रुपये की जमीन हड़पने के मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की याचिका पर राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार ने कहा कि नेहा जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और विदेश जाने की तैयारी में हैं।

लुकआउट सर्कुलर जारी करने की कार्रवाई

इसी के चलते उनके विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। राज्य शासन ने सहआरोपितों से मिलीभगत का आरोप भी लगाया। हाई कोर्ट ने फिलहाल नेहा को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है और राज्य से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।


गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिए जाने का विरोध

न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ में राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एचएस रूपराह ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नेहा की अग्रिम जमानत अर्जी अधीनस्थ अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। राज्य की ओर से इन परिस्थितियों में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिए जाने का विरोध किया गया।

वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे बोले- नेहा को झूठा फंसाया गया

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने कहा कि नेहा को झूठा फंसाया गया है। उनका तर्क था कि एफआइआर को उसके मूल रूप में देखने पर भी नेहा के विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता। उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप या सहआरोपितों से संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि नेहा दो नाबालिग बच्चों की मां हैं और उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।

बिना वकालतनामा पेश हुए अधिवक्ता को हिदायत

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अवनीश तिवारी वीडियो कान्फ्रेंसिंग से उपस्थित हुए और खुद को तीसरे प्रतिवादी की ओर से पेश बताया। उन्होंने नेहा पर उन्हें जान से मारने की धमकी देने और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप लगाया।

तीसरे प्रतिवादी की ओर से कोई वकालतनामा नहीं

अदालत के पूछने पर उन्होंने बताया कि उनके पास तीसरे प्रतिवादी की ओर से कोई वकालतनामा नहीं है। इस पर कोर्ट ने उन्हें भविष्य में अधिक सतर्क रहने की हिदायत दी और कहा कि किसी पक्ष की ओर से दलील शुरू करने से पहले अदालत की अनुमति लेना आवश्यक है। कोर्ट ने राज्य को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

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