MP हाई कोर्ट ने प्रदेश में 54 बाघों की मौत पर मांगा जवाब -जनहित याचिका पर केंद्र व राज्य शासन, एनटीसीए को नोटिस
दलील दी गई कि वर्ष 1973 में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर के बाद यह पहला मौका है, जब किसी एक राज्य में एक ही वर्ष में इतने अधिक बाघों की मौतें हुई हैं। मौत ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 20 Jan 2026 07:44:55 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Jan 2026 07:53:39 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट।HighLights
- पूरी दुनिया में कुल 5,421 बाघ ही हैं।
- इनमें से 3,167 भारत में पाए जाते हैं।
- मध्य प्रदेश में 785 टाइगर मौजूद हैं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 में प्रदेश में 54 बाघों की मौत का दावा करने वाली जनहित याचिका को गंभीरता से लिया। इसी के साथ केंद्र व राज्य शासन के साथ नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी (एनटीसीए) को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी।
जनहित याचिकाकर्ता राजधानी भोपाल निवासी वन्य प्राणी कार्यकर्ता अजय दुबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी व अलका सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पूरी दुनिया में कुल 5,421 बाघ हैं, जिनमें से 3,167 भारत में पाए जाते हैं। मध्य प्रदेश में ही 785 टाइगर मौजूद हैं।
इसीलिए मप्र को टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है। वर्ष 2025 के दौरान प्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई है। दलील दी गई कि वर्ष 1973 में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर के बाद यह पहला मौका है, जब किसी एक राज्य में एक ही वर्ष में इतने अधिक बाघों की मौतें हुई हैं। मौतों के पीछे पोचिंग, करंट, रेल हादसे और रहस्यमयी घटनाएं शामिल हैं।
हर साल ऐसे बढ़ रही मौतों की संख्या :
- 2021: 34 मौतें
- 2022: 43 मौत
- 2023: 45 मौतें
- 2024: 46 मौतें
- 2025: 54 मौतें