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एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला... 10 किसानों को 10 दिन में दें ब्याज सहित मुआवजा, वरना तलब होंगे कलेक्टर और MD

हाई कोर्ट ने अनूपपुर जिले में करीब एक दशक पहले अधिग्रहित 10 किसानों की जमीन का मुआवजा अब तक नहीं मिलने पर सख्त रुख अपनाया है।

By Surendra DubeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 17 Aug 2026 03:15:48 PM (IST)Updated Date: Mon, 17 Aug 2026 03:15:48 PM (IST)
एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला... 10 किसानों को 10 दिन में दें ब्याज सहित मुआवजा, वरना तलब होंगे कलेक्टर और MD
एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

HighLights

  1. 10 किसानों को 10 दिन में ब्याज सहित मुआवजा देने के निर्देश
  2. भुगतान न होने पर कलेक्टर और NHAI-MPRDC के MD होंगे तलब
  3. हाई कोर्ट ने एसडीएम के निलंबन की भी मांगी पूरी रिपोर्ट

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने अनूपपुर जिले में करीब एक दशक पहले अधिग्रहित 10 किसानों की जमीन का मुआवजा अब तक नहीं मिलने पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने कहा कि मुआवजा पाने के लिए किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने अनूपपुर कलेक्टर, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन (एमपीआरडीसी) को 10 दिन में ब्याज सहित पूरा मुआवजा भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का पालन नहीं होने पर कलेक्टर के साथ दोनों एजेंसियों के एमडी को कोर्ट में तलब करने की चेतावनी दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।


2016-17 में जमीन ली, अब तक मुआवजे का इंतजार

मामला कोतमा थाना क्षेत्र के ग्राम बुरहानपुर निवासी ज्ञान सिंह और नौ अन्य किसानों की याचिकाओं से जुड़ा है। किसानों की जमीनें नेशनल हाईवे-43 के चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2016-17 में अधिग्रहित की गई थीं। जमीन अधिग्रहण के बाद भी मुआवजा नहीं मिलने पर प्रभावित किसानों ने हाई कोर्ट की शरण ली।

कौन भुगतान करेगा, यह किसान क्यों तय करे

सुनवाई के दौरान एनएचएआई और एमपीआरडीसी के बीच मुआवजे की राशि के भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति सामने आई। इस पर कोर्ट ने दो टूक कहा कि दोनों सरकारी एजेंसियां हैं। किसान को इस विवाद में नहीं उलझाया जा सकता कि पैसा कौन देगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों में से कोई एक एजेंसी पहले किसानों को मुआवजा दे और बाद में दोनों आपस में राशि का हिसाब कर लें।

आदेश नहीं माना तो अधिकारी कोर्ट में

हाई कोर्ट ने 10 दिन की स्पष्ट समय-सीमा तय की है। ब्याज सहित भुगतान नहीं होने पर अनूपपुर कलेक्टर के साथ एनएचएआई और एमपीआरडीसी के एमडी को न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा।

एसडीएम के निलंबन की रिपोर्ट भी तलब

सुनवाई में बताया गया कि किसानों की शिकायतों के बाद कोतमा के भू-अर्जन अधिकारी एवं एसडीएम मिलिंद नागदेव को निलंबित किया गया था। हाई कोर्ट ने अनूपपुर कलेक्टर को अगली सुनवाई में एसडीएम के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व पैनल अधिवक्ता अन्वेष श्रीवास्तव व एमपीआरडीसी की ओर से अधिवक्ता अंकित कुमार पांडे ने पक्ष रखा।

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