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जबलपुर की मदन महल पहाड़ी पर आकार लेने लगा रानी दुर्गावती स्मारक, 24 एकड़ क्षेत्र में पर्यटन का नया केंद्र

पहाड़ी पर रानी दुर्गावती के जीवन, शौर्य और गोंडवाना की विरासत को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय, उद्यान, सौंदर्यीकरण और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित क...और पढ़ें

By Pankaj TiwariEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 17 Aug 2026 01:11:26 PM (IST)Updated Date: Mon, 17 Aug 2026 02:22:43 PM (IST)
जबलपुर की मदन महल पहाड़ी पर आकार लेने लगा रानी दुर्गावती स्मारक, 24 एकड़ क्षेत्र में पर्यटन का नया केंद्र
2024 में प्रतिमा के डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति और पेडस्टल सहित स्थापना के लिए अलग निविदा जारी की थी।नईदुनिया

HighLights

  1. करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है
  2. पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की उम्मीद है
  3. पहाड़ी पर अभी भी 40 से अधिक निर्माण मौजूद हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मदन महल की ऐतिहासिक पहाड़ी पर वीरांगना रानी दुर्गावती के स्मारक और संग्रहालय के निर्माण की कवायद अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। लंबे समय से अतिक्रमण के कारण अटके इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जमीन खाली मिलने के बाद ठेकेदार ने निर्माण संबंधी प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिए हैं।

विशेषज्ञ कलाकार या मूर्तिकार को काम सौंपा जाएगा

परियोजना के प्रमुख आकर्षणों में करीब 52 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा होगी। प्रतिमा के निर्माण और स्थापना के लिए अलग से विशेषज्ञ कलाकार या मूर्तिकार को काम सौंपा जाना प्रस्तावित है। मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने 2024 में प्रतिमा के डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति और पेडस्टल सहित स्थापना के लिए अलग निविदा जारी की थी। इसकी अनुमानित लागत करीब 10.25 करोड़ रुपये रखी गई थी।


अतिक्रमण के कारण दो साल तक नहीं शुरू हो पाया काम

मदन महल की पहाड़ी पर स्मारक निर्माण की घोषणा रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती के अवसर पर की गई थी। अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीरांगना रानी दुर्गावती स्मारक और उद्यान का भूमिपूजन किया था। इसके बाद 2024 में निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन मौके पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका।

पहाड़ी पर पहले 300 से अधिक अवैध कब्जे और निर्माण थे। इन्हें हटाने की प्रक्रिया में लंबा समय लगा। मध्यप्रदेश पर्यटन निगम की ओर से भी प्रशासन को कई बार पत्र लिखकर जमीन खाली कराने का आग्रह किया गया था। प्रशासन की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब निर्माण के लिए आवश्यक हिस्सा खाली हो गया है।

40 से अधिक निर्माण मौजूद हैं, जिन्हें हटाया जाएगा

पहाड़ी पर अभी भी 40 से अधिक निर्माण मौजूद हैं, जिन्हें हटाया जाना बाकी है। मदन महल की पहाड़ियों से जुड़े अतिक्रमण का मामला पहले भी न्यायिक स्तर पर सामने आ चुका है। पूर्व में पहाड़ी को अतिक्रमण मुक्त कर हरियाली विकसित करने के निर्देश दिए गए थे।

70.51 करोड़ की निविदा से होगा मुख्य निर्माण

परियोजना के सिविल, आर्टवर्क तथा आंतरिक और बाहरी विद्युतीकरण के लिए मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने 2024 में निविदा जारी की थी। आधिकारिक निविदा दस्तावेज के अनुसार इसकी अनुमानित लागत 70 करोड़ 51 लाख 40 हजार रुपये थी और कार्य की निर्धारित अवधि 720 दिन यानी दो वर्ष रखी गई थी।

रानी दुर्गावती के जीवन, गोंडवाना के इतिहास जानेंगे

परियोजना में संग्रहालय भवन के साथ लैंडस्केपिंग, उद्यान, विद्युत व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और कलात्मक कार्य शामिल हैं। संग्रहालय में रानी दुर्गावती के जीवन, गोंडवाना के इतिहास, जनजातीय संस्कृति और वीरता से जुड़े प्रसंगों को आधुनिक संग्रहालय तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किए जाने की योजना है।

संग्रहालय में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

परियोजना के अगले चरण में संग्रहालय में एचवीएसी (हीटिंग, वेंटिलेशन एंड एयर कंडीशनिंग), आंतरिक-बाहरी विद्युत व्यवस्था और इल्यूमिनेशन जैसे तकनीकी कार्य भी किए जाने हैं। 2026 में पर्यटन निगम ने रानी दुर्गावती संग्रहालय के उन्नयन और विकास, विद्युत, एचवीएसी तथा रोशनी संबंधी कार्यों के लिए करीब 15.43 करोड़ रुपये की एक और निविदा जारी की थी। इसकी कार्य अवधि 540 दिन निर्धारित की गई थी।

24 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र में पर्यटन का नया केंद्र

मदन महल क्षेत्र के करीब 24 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र को रानी दुर्गावती संग्रहालय एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना सामने आई है। परियोजना में संग्रहालय के अलावा खुले क्षेत्र, उद्यान और पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जाना है।

एक बड़े पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित होगा

इस परियोजना को आसपास के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से जोड़कर एक बड़े पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। देवताल, शारदा माता मंदिर और संग्राम सागर तालाब का जीर्णोद्धार पहले ही कराया जा चुका है। अब मदन महल की पहाड़ी पर निर्माण शुरू होने से इन स्थलों को एक साथ जोड़कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की उम्मीद है।

दो साल में पूरा करने का लक्ष्य

मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के इंजीनियर वीरेंद्र सिंह के अनुसार, निर्माण के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध हो चुकी है और ठेकेदार ने कार्य शुरू कर दिया है। निर्धारित कार्य अवधि के अनुसार परियोजना को करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रतिमा का निर्माण अलग कार्य के रूप में कराया जाएगा।

ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में प्रमुख आकर्षण बन सकते हैं

ऐसे में अतिक्रमण के कारण लंबे समय से रुका रानी दुर्गावती स्मारक प्रोजेक्ट अब धीरे-धीरे आकार लेने लगा है। पूरा होने के बाद मदन महल की पहाड़ी पर स्थापित होने वाली विशाल कांस्य प्रतिमा और संग्रहालय जबलपुर के ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में एक नया प्रमुख आकर्षण बन सकते हैं।

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