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जबलपुर में दौड़ रहीं आधुनिक ई-बसें, लेकिन खस्ताहाल 200 बस स्टॉप, 15 लाख की लागत से बने नए स्टैंड भी बदहाल

घमापुर, रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट, बल्देवबाग और नौदरा ब्रिज सहित प्रमुख मार्गों पर बने बस स्टापों की हालत ऐसी है कि यात्रियों को बैठने के बजाय सड़क किन...और पढ़ें

By Sunil dahiyaEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Wed, 07 Oct 2026 11:22:07 AM (IST)Updated Date: Wed, 07 Oct 2026 12:12:05 PM (IST)
जबलपुर में दौड़ रहीं आधुनिक ई-बसें, लेकिन खस्ताहाल 200 बस स्टॉप, 15 लाख की लागत से बने नए स्टैंड भी बदहाल
बस स्टॉप से बुनियादी सुविधाएं गायब, यात्री परेशान, (नईदुनिया)

HighLights

  1. जबलपुर में फर्राटा भर रहीं नई ई-बसें
  2. शहर में बने 200 बस स्टॉप खस्ताहाल
  3. बुनियादी सुविधाएं गायब, यात्री परेशान

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत 45 अत्याधुनिक पीएम ई-बसों सहित 55 अन्य बसों के संचालन से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बेहतर हुई है, लेकिन बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों की परेशानी अब भी कम नहीं हुई है।

शहर में करीब 200 बस स्टाप गंदगी, अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं से घिरे हैं। घमापुर, रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट, बल्देवबाग और नौदरा ब्रिज सहित प्रमुख मार्गों पर बने बस स्टापों की हालत ऐसी है कि यात्रियों को बैठने के बजाय सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।


इन बस स्टॉपों से रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग और आम नागरिक सफर करते हैं। यात्रियों का कहना है कि जब परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है, तो बसों के इंतजार के लिए जरूरी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

नियमित सफाई, सुरक्षित बैठक व्यवस्था और अतिक्रमण से मुक्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं भी यहां नदारद हैं।

दोबारा बनाए गए , रखरखाव के अभाव में बदरंग

शहर में मेट्रो बस सेवा शुरू होने के साथ करीब 14 साल पहले लगभग 200 बस स्टॉप बनाए गए थे। नगर निगम ने शुरुआती दौर में बस स्टॉप तैयार कराए, लेकिन रखरखाव के अभाव में वे टूटने लगे। इसके बाद स्मार्ट सिटी ने पीपीपी मॉडल पर नए बस स्टॉप तैयार कराए।

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विज्ञापन एजेंसियों ने इन्हें बनाने में रुचि दिखाई, जबकि रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की थी। इसके बावजूद व्यवस्था नहीं सुधरी। अधिकांश बस स्टॉप से रेलिंग गायब हो चुकी हैं। कई जगह अवैध पार्किंग और अतिक्रमण ने जगह घेर ली है। कुछ बस स्टॉप अस्थायी ठिकानों में तब्दील हो गए हैं। हाल ही में करीब 15-15 लाख रुपये खर्च कर बनाए गए नए बस स्टॉप भी बदहाली से अछूते नहीं हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के साथ उसके बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

इन मार्गों के लिए हो रहा बसों का संचालन

मदर टेरेसा से घाना, आईटीआई, दीनदयाल बस स्टैंड, विजय नगर, बल्देव बाग, रानीताल, तीन पत्ती बस स्टैंड, नौदरा ब्रिज, घंटाघर, कलेक्ट्रेट, रेलवे प्लेटफॉर्म नंबर 6, हाई कोर्ट, घमापुर, बाई का बगीचा, कंचघर, सतपुला तिराहा, पनेहरा पेट्रोल पंप, व्हीकल टर्निंग, गोकलपुर, जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, रांझी, खमरिया पेट्रोल पंप, खमरिया फैक्ट्री सहित आईएसबीटी, दमोह नाका, बल्देव बाग, रानीताल, तीन पत्ती बस स्टैंड, शास्त्री ब्रिज, मदन महल, प्रेमनगर, शारदा चौक, त्रिपुरी चौक, मेडिकल, धवनत्री नगर तिराहा, अंधमुख बायपास, तेवर, त्रिपुरी सुंदरी मंदिर, कुदन, मिरगंज, भेड़ाघाट चौक, शिल्पी नगर, पंचवटी, धुआंधार रूट पर संचालित की जा रही है।

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