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'कमर्शियल दुकानें बने नर्सिंग कॉलेज'... MP नर्सिंग घोटाला मामले में हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, 130 कॉलेजों की अर्जी खारिज

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सीबीआई जांच से बच रहे प्रेस्टन कॉलेज सहित करीब 130 न...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 18 Aug 2026 07:53:03 PM (IST)Updated Date: Tue, 18 Aug 2026 07:53:03 PM (IST)
'कमर्शियल दुकानें बने नर्सिंग कॉलेज'... MP नर्सिंग घोटाला मामले में हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, 130 कॉलेजों की अर्जी खारिज
MP नर्सिंग घोटाला मामले में हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

HighLights

  1. सीबीआई जांच से बच रहे 130 कॉलेजों को हाई कोर्ट से राहत नहीं
  2. 2,395 छात्रों के रिजल्ट की अनुमति, बिना पढ़ाई डिग्री पर रोक
  3. फर्जीवाड़ा रोकने ANM-GNM में प्रवेश परीक्षा कराने का सुझाव

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सीबीआई जांच से बच रहे प्रेस्टन कॉलेज सहित करीब 130 नर्सिंग संस्थानों को राहत देने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने इन संस्थानों से जुड़ी अंतरिम अर्जियां निरस्त कर दीं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ नर्सिंग संस्थान शिक्षा देने के बजाय कमर्शियल दुकानों की तरह संचालित हो रहे हैं। बिना पर्याप्त फैकल्टी, अधोसंरचना, कक्षाओं और प्रायोगिक प्रशिक्षण के डिग्री देना मरीजों और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।


सीबीआई जांच के सवाल पर कोई प्रमोटर आगे नहीं आया

सुनवाई में संबंधित कॉलेजों की ओर से सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत का हवाला देते हुए परीक्षा परिणाम घोषित करने और विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश देने की मांग की गई। कोर्ट ने प्रमोटरों से पूछा कि क्या वे सीबीआई जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। बार-बार पूछे जाने के बावजूद कोई प्रमोटर जांच का सामना करने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने इन संस्थानों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर 2026 को होगी। मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार को संपूर्ण रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

4,475 में से 2,395 छात्र स्थानांतरित, परिणाम घोषित करने की अनुमति

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने बताया कि अनसूटेबल कॉलेजों के कुल 4,475 जीएनएम विद्यार्थियों में से 2,395 विद्यार्थियों को सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जा चुका है। विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को देखते हुए कोर्ट ने इन 2,395 छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित करने की अनुमति दी है। हालांकि, परिणाम जारी होने मात्र से अगली कक्षा में प्रवेश या पदोन्नति का स्वतः अधिकार नहीं मिलेगा। विद्यार्थियों को परीक्षा में अपनी योग्यता साबित करनी होगी।

कमी है तो अतिरिक्त कक्षाएं और डबल शिफ्ट चलाने के निर्देश

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरित विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रैक्टिकल में यदि कोई कमी रह गई है तो संबंधित सूटेबल कॉलेजों में अतिरिक्त कक्षाएं व डबल शिफ्ट चलाकर उसे पूरा कराया जाए। शेष 2,080 विद्यार्थियों को भी जल्द सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिना प्रैक्टिकल की डिग्री मरीजों के लिए खतरा

लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और विशाल बघेल ने विद्यार्थियों के स्थानांतरण पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि कई विद्यार्थियों ने ऐसे कॉलेजों में प्रवेश लिया था जहां पर्याप्त फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं था। कोर्ट ने कहा कि नर्सिंग में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। पर्याप्त शिक्षा और प्रायोगिक प्रशिक्षण के बिना तैयार नर्सिंग विद्यार्थी भविष्य में मरीजों और समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

एएनएम-जीएनएम में प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव

फर्जीवाड़े और डमी विद्यार्थियों की समस्या पर स्थायी अंकुश लगाने के लिए एएनएम और जीएनएम पाठ्यक्रमों में सीधे काउंसलिंग के बजाय प्रवेश परीक्षा कराने का सुझाव भी रखा गया। प्रवेश परीक्षा के आधार पर मेरिट तैयार कर कॉलेज आवंटित करने के प्रस्ताव को कोर्ट ने उचित माना। राज्य सरकार और संबंधित नर्सिंग काउंसिल को इस पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

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