
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट में बहुचर्चित प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई मंगलवार को फिर नहीं हो सकी। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी में 20 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई को देखते हुए मामले को आगे नहीं बढ़ाया। हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 26 अगस्त की तारीख तय की है।
दरअसल, पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि वर्ष 2025 के नए प्रमोशन नियम लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुमति ली गई थी या नहीं। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने बताया था कि प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े कई राज्यों के मामलों की याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
हाई कोर्ट ने तब स्पष्ट किया था कि विरोधाभासी न्यायिक फैसलों की स्थिति से बचने के लिए राज्य सरकार और याचिकाकर्ता मिलकर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई के लिए संयुक्त आवेदन प्रस्तुत करें। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आने के बाद ही 2025 के प्रमोशन नियमों की वैधता तथा वर्ष 2016 के बाद हुई पदोन्नतियों की स्थिति तय की जा सकेगी।
सुनवाई के दौरान सामान्य वर्ग की ओर से प्रमोशन में आरक्षण को लेकर कई अहम तर्क रखे गए। कहा गया कि अनेक विभागों में आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व निर्धारित स्तर तक पहले ही पूरा हो चुका है, इसके बावजूद पदोन्नति में आरक्षण दिया जा रहा है।
यह भी तर्क दिया गया कि मेरिट के आधार पर चयनित आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति के समय फिर आरक्षित वर्ग की सूची में शामिल करने से पदोन्नति व्यवस्था का संतुलन प्रभावित होता है। बहस में सुप्रीम कोर्ट के जरनेल सिंह और एम नागराज मामलों में दिए गए फैसलों का भी हवाला दिया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की सुनवाई के बाद ही हाई कोर्ट में इस महत्वपूर्ण विवाद पर आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।