
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। घरों के पूजाघरों से लेकर देवी मंदिरों तक आस्था के दीप प्रज्वलित होंगे। शंखध्वनि, घंटियों की गूंज और जय माता दी के जयकारों के बीच मां भगवती की आराधना का महापर्व आरंभ होगा। तेवर स्थित मां त्रिपुर सुंदरी से लेकर बड़ी खेरमाई और बूढ़ी खेरमाई तक देवी मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचेंगे।

ज्योतिर्विद एवं वास्तुविद् पं. सौरभ दुबे के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। धार्मिक मान्यता में हाथी को सुख-समृद्धि, शांति और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है।
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पं. सौरभ दुबे के अनुसार, इस बार नवरात्र में चित्रा नक्षत्र के साथ कन्या और तुला राशि का संयोग बन रहा है। उन्होंने सर्वार्थसिद्धि योग और रवियोग को भी विशेष महत्व का बताया है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, हाथी पर माता का आगमन अन्न-धान्य की वृद्धि और समृद्धि से जोड़ा जाता है। शक्ति आराधना का यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए साधना, संयम और सकारात्मकता का संकल्प दोहराने का अवसर भी है।
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आश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर आज घर-घर में कलश स्थापना, जवारा रोपण और अखंड ज्योति प्रज्वलित करने के साथ देवी आराधना शुरू होगी। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के मार्गदर्शन में घटस्थापना करेंगे। पं. सौरभ दुबे द्वारा बताए गए घटस्थापना के मुहूर्त इस प्रकार हैं।

संस्कारधानी की धार्मिक पहचान में तेवर स्थित मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर और बड़ी खेरमाई मंदिर की विशेष आस्था परंपरा का महत्वपूर्ण स्थान है। नवरात्र में देवी दर्शन, पूजन और आरती के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ेगी।
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घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी मंत्रों का जाप, व्रत-उपवास और कन्या पूजन की तैयारियां होंगी। पीढ़ियों से चली आ रही पूजा परंपराएं परिवारों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ेंगी।

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाएगी। 18 अक्टूबर को महाष्टमी और 19 अक्टूबर को महानवमी के अनुष्ठान होंगे, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस प्रकार देवी साधना से लेकर विजयादशमी तक संस्कारधानी में 10 दिनों तक उत्सवी वातावरण बना रहेगा।

नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि नारी शक्ति, साहस, करुणा और सेवा के संकल्प को दोहराने का अवसर भी है। मां दुर्गा के नौ स्वरूप जीवन में धैर्य और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।

मां नर्मदा की नगरी में श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, समाज में सौहार्द और जनकल्याण की कामना करेंगे। आज घटस्थापना के साथ संस्कारधानी में भक्ति का नया अध्याय आरंभ होगा और मंदिरों से घरों तक जय माता दी का नाद गूंजेगा।

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