• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

प्रमोशन में आरक्षण मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को, हाई कोर्ट में अजाक्स ने रखा पक्ष

दलील दी गई कि भारत के संविधान व सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी के फैसलों में यह स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि सर्वप्रथम अनारक्षित वर्ग में प्रमोशन होंगे...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 06 Jan 2026 07:25:29 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Jan 2026 07:32:56 PM (IST)
प्रमोशन में आरक्षण मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को, हाई कोर्ट में अजाक्स ने रखा पक्ष
मध्‍य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का मामला।

HighLights

  1. न्यायिक प्रक्रिया के कारण प्रमोशन बाधित नहीं होना चाहिए
  2. मध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट में अजाक्स की ओर से रखा गया पक्ष
  3. प्रमोशन में आरक्षण मामला, अगली सुनवाई 13 जनवरी को

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बनाए नियम को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई हुई। अजाक्स की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायदृष्टांतों का हवाला देते हुए करीब डेढ़ घंटे तक दलीलें रखी गईं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को निर्धारित की है।

अजाक्स की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डा. केएस चौहान व रामेश्वर सिंह ठाकुर ने प्रमोशन नियम-2025 के उप नियम 11 (1,2,3) सहित अन्य नियम को पूर्णतः असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि इन नियमों में आरक्षित वर्ग की ग्रेडेशन लिस्ट बनाने का प्रविधान है। आरक्षित वर्ग के कर्मचारी जो मेरिट के आधार पर पदोन्नत हुए हैं उनको भी आरक्षित वर्ग में गणना करने का प्रविधान किया गया है। इसमें एससी एसटी वर्ग के लिए मेरिट पर प्रमोशन से संबंधित कोई भी प्रविधान मौजूद नहीं है।


दलील दी गई कि भारत के संविधान व सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी के फैसलों में यह स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि सर्वप्रथम अनारक्षित वर्ग में प्रमोशन होंगे। इसके बाद आरक्षित वर्ग के जो कर्मचारी मेरिट के आधार पर अनारक्षित में चयनित होंगे उनकी गणना आरक्षित वर्ग में किए जाने का भी नियमों मे प्रविधान है। अजाक्स की ओर से कहा गया कि न्यायिक प्रक्रिया के कारण प्रमोशन बाधित नहीं होना चाहिए।

बहस के दौरान यह तर्क भी दिया गया कि प्रमोशन के नियमों में क्रीमिलेयर न तो सैद्धांतिक के रूप से और ना ही व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सकता है। इस संबंध में कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। मध्य प्रदेश के समस्त विभागों में मौजूद कर्मचारी के प्रस्तुत डाटा के मुताबिक आरक्षित वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। एससी एसटी की कुल आबादी मध्य प्रदेश में 36 प्रतिशत है जिनका उच्च पदों पर प्रतिनिधित्व 7 से 18 प्रतिशत की है।