
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। विशेष न्यायालय (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अभियुक्त हर्ष नायक को लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है।
विशेष प्रकरण क्रमांक में विशेष न्यायाधीश अभिलाषा एन मवावर ने 13 अक्टूबर 2026 को यह निर्णय सुनाया। अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता शांतनु अयाची व अधिवक्ता आदर्श हीरा ने पैरवी की।
अभियोजन का आरोप था कि अभियुक्त ने कथित आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री डाउनलोड कर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से अन्य व्यक्तियों तक प्रसारित की थी। मामले में पुलिस साक्षियों, विवेचना अधिकारी और साइबर फारेंसिक विशेषज्ञ के बयान कराए गए।
अभियुक्त का मोबाइल फोन जब्त कर उसकी डिजिटल फारेंसिक जांच भी कराई गई। न्यायालय ने मौखिक, दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि जब्त मोबाइल फोन की फारेंसिक जांच में कथित बाल यौन शोषण सामग्री से संबंधित वीडियो न तो उपलब्ध डेटा में मिला और न ही हटाए गए डेटा की रिकवरी के दौरान प्राप्त हुआ।
अभियोजन की फाॅरेंसिक रिपोर्ट से भी ऐसी सामग्री की मौजूदगी प्रमाणित नहीं हुई। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष ऐसा विश्वसनीय और निर्णायक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे संदेह से परे साबित हो कि कथित सामग्री अभियुक्त ने ही डाउनलोड की थी अथवा किसी अन्य व्यक्ति को भेजी या प्रसारित की थी।
कथित सामग्री के प्रसारण के संबंध में स्वतंत्र और विश्वसनीय इलेक्ट्रानिक साक्ष्य का अभाव भी महत्वपूर्ण रहा। समस्त साक्ष्यों और परिस्थितियों के समग्र मूल्यांकन के बाद न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा। इसी आधार पर अभियुक्त हर्ष नायक को दोनों अधिनियमों के तहत लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।
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