
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। छिंदवाड़ा के परासिया में कफ सीरप पीने से 27 बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डाॅ. प्रवीण सोनी को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। उन्होंने अपने विरुद्ध दर्ज एफआइआर और दाखिल चार्जशीट को निरस्त कराने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मृत बच्चों के अभिभावकों को भी याचिका में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए। कोर्ट के रुख के बाद डा. सोनी की ओर से याचिका वापस ले ली गई। हाई कोर्ट ने याचिका वापस लिए जाने के आधार पर उसका निराकरण कर दिया।
डाॅ. सोनी ने याचिका दायर कर अपने विरुद्ध परासिया थाने में दर्ज अपराध और चार्जशीट को चुनौती दी थी। याचिका में बीएनएस की धारा 105 सहित अन्य धाराओं तथा ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट के तहत की गई कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि उन्होंने बच्चों का उपचार किया था और कफ सीरप के निर्माण अथवा उसमें कथित मिलावट से उनका कोई संबंध नहीं है। वहीं, शासन की ओर से मामले की गंभीरता और 27 बच्चों की मौत का हवाला दिया गया।
इसके बाद डाॅ. सोनी की ओर से याचिका वापस लेने का आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर याचिका का निराकरण कर दिया।
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