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तीन तलाक के आरोप में पति को राहत नहीं, FIR निरस्त करने से हाई कोर्ट का इनकार

कोर्ट ने कहा कि मुकदमे की प्रक्रिया जारी रहेगी और आरोपों का निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर होगा।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 05:40:19 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 05:40:19 PM (IST)
तीन तलाक के आरोप में पति को राहत नहीं, FIR निरस्त करने से हाई कोर्ट का इनकार

HighLights

  1. आरोपों की सच्चाई और साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा
  2. एकलपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में किया जाएगा
  3. पति ने पत्‍नी के सभी आरोपों को झूठा बताया

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने पत्नी को कथित तौर पर तीन तलाक देने, दहेज मांगने और उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में पति व अन्य आरोपितों के खिलाफ दर्ज एफआइआर निरस्त करने से इनकार कर दिया।

साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन उचित नहीं

न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि आरोपों की सच्चाई और साक्ष्यों का परीक्षण ट्रायल कोर्ट में किया जाएगा। इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन उचित नहीं है।

29 जुलाई 2021 को भोपाल में हुआ था निकाह

महाराष्ट्र के नासिक निवासी सुफीयान खान व अन्य की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया। याचिका के अनुसार, सुफीयान का निकाह 29 जुलाई 2021 को भोपाल में नियाज से हुआ था।

2023 में महिला थाने में एफआइआर दर्ज हुई थी

वैवाहिक विवाद के बाद पत्नी की शिकायत पर वर्ष 2023 में महिला थाने में एफआइआर दर्ज हुई थी। इसमें आईपीसी की धारा 498-ए, 377, 354, 506 सहपठित धारा 34, दहेज प्रतिषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत आरोप लगाए गए थे।

रहने की जगह को लेकर विवाद था

पति की ओर से आरोपों को झूठा बताते हुए कहा गया कि रहने की जगह को लेकर विवाद था। राज्य की ओर से पैनल अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला और पत्नी की ओर से अधिवक्ता नईम खान ने पक्ष रखा।

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