
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। 114 किलोमीटर लंबी रिंग में तीसरा चरण अंतिम दौर में है। पिछले दिनों हीरापुर बांधा गांव के पास रोड ओवर ब्रिज का निर्माण पूरा हुआ है। करीब 24 किलोमीटर लंबा पौने पांच सौ करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पैकेज को जून 2026 तक पूरा किया जाना है। ओवरऑल रिंग रोड का अधिकांश काम 2026 के अंत तक पूरा होना है। सिर्फ पांचवें चरण को साल 2027 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने बताया कि रिंग रोड में तीन रोड ओवर ब्रिज हैं; एक भटौली पर पहले ही बन चुका है, दो बाकी हैं। ये दोनों पैकेज तीन और चार पर हैं। पिछले दिनों पैकेज तीन का आरओबी का काम हुआ और सफलतापूर्वक गर्डर डाला गया। इस रेल ओवर ब्रिज की लंबाई एक किलोमीटर है, इसमें ब्रिज का हिस्सा जो रेल लाइन के ऊपर से निकला है उसकी लंबाई 76 मीटर है। उन्होंने बताया कि जून के आखिरी तक यह काम पूरा हो जाएगा। तीसरा चरण एनएच-45 से कुशनेर के बीच बन रहा है। इसकी कुल लंबाई 36 किलोमीटर है और इस पर पौने पांच सौ करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
पहला चरण (बरेला से मानेगांव): इसकी दूरी करीब 16 किलोमीटर है, जिसे साढ़े 448 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। यह काम लगभग पूरा है, सिर्फ छह प्रतिशत काम बाकी है। इसे अप्रैल में पूरा कर लिया जाएगा।
दूसरा चरण (मानेगांव से एनएच-45): इसकी लंबाई करीब 20 किलोमीटर है, जिसे 535 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसमें ब्रिज का निर्माण बाकी है, जिसे छोड़कर करीब 70 प्रतिशत काम पूर्ण है। यह जून 2026 तक पूर्ण होगा।
तीसरा चरण (एनएच-45 से कुशनेर): इसकी लंबाई करीब 36 किलोमीटर है और इसे 474 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। यह चरण जून तक पूरा होगा।
चौथा चरण (कुशनेर से अमझर): यह रिंग रोड का हिस्सा बनेगा, जिसकी लंबाई करीब 24 किलोमीटर है। इसे 342 करोड़ रुपये से निर्माण किया जा रहा है। यह काम भी जून तक पूरा होगा।
अंतिम चरण (अमझर से बरेला): इसकी लंबाई करीब साढ़े 18 किलोमीटर है। इस काम को साल 2027 तक पूरा किया जाना है।
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