
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। महाकौशल के प्रमुख सरकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल के शिशु रोग विभाग में छह माह की मासूम बच्ची आयुषी की मौत ने अस्पताल की उपचार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मासूम की मौत के बाद स्वजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन को मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करनी पड़ी है।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इलाज के दौरान ऐसी क्या चूक हुई, जिससे मासूम की जान चली गई। क्या बच्ची को समय पर जरूरी उपचार मिला था। इन सभी सवालों के जवाब अब जांच कमेटी तलाशेगी।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर नवनीत सक्सेना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी में अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर अरविंद शर्मा, शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर पवन घनघोरिया और डॉक्टर रानू तिवारी मिश्रा को शामिल किया गया है।
कमेटी बच्ची के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड, चिकित्सकीय प्रक्रिया और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की पड़ताल करेगी। कमेटी को पांच दिवस के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
परिवार जवाब मांग रहा
एक तरफ मासूम की मौत का दर्द झेल रहा परिवार जवाब मांग रहा है, वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच बैठाकर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। अब निगाहें पांच दिन में आने वाली जांच रिपोर्ट पर हैं, क्या रिपोर्ट मौत की वजह और कथित लापरवाही का सच सामने ला पाएगी।
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