
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से छूट की मांग कर रहे शिक्षाकर्मी वर्ग-2 और वर्ग-3 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से राहत मिली है।
हाई कोर्ट ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिए हैं कि शिक्षकों की ओर से प्रस्तुत अभ्यावेदन पर 60 दिन के भीतर निर्णय लिया जाए। निर्णय कारण सहित आदेश के रूप में पारित करना होगा।
मामले में याचिकाकर्ता शिक्षाकर्मियों की ओर से टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने की मांग उठाई गई थी। उनका पक्ष था कि उनकी नियुक्ति और सेवा से जुड़े तथ्यों को ध्यान में रखते हुए छूट के अभ्यावेदन पर विचार किया जाना चाहिए।
इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत अभ्यावेदन पर निर्णय की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
हाई कोर्ट के निर्देश का आशय यह है कि संबंधित अधिकारी निर्धारित अवधि में अभ्यावेदन पर विचार कर अपना निर्णय देंगे। आदेश में अभ्यावेदन पर कारण सहित निर्णय लेने की समय-सीमा तय की गई है।
इसे टीईटी से स्वतः छूट मिलना नहीं माना जा सकता। शिक्षकों को वास्तविक राहत सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
यह भी पढ़ें- सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग को 5 प्रतिशत छूट देने पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अहम आदेश