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जबलपुर में 11 केवी लाइन पर करंट से आउटसोर्स कर्मी की मौत, ऑनलाइन परमिट व्यवस्था के बावजूद पांचवीं घटना

विभागीय अधिकारियों का दावा है कि काम से पहले परमिट लिया गया था और बिजली आपूर्ति बंद की गई थी। इसके बाद भी लाइन में करंट कैसे आया, इसकी जांच की जा रही ...और पढ़ें

By Pankaj TiwariEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 09:26:01 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 09:26:01 PM (IST)
जबलपुर में 11 केवी लाइन पर करंट से आउटसोर्स कर्मी की मौत, ऑनलाइन परमिट व्यवस्था के बावजूद पांचवीं घटना
हादसे में कर्मचारी पोल से करीब 16 फीट नीचे गिर गया था। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. परिवार में अकेला कमाने वाला था बिहारी लाल
  2. बेलखेड़ा में हादसा, तीन दिन में आएगी जांच रिपोर्ट
  3. एकीकृत विद्युत कटौती प्रबंधन प्रणाली पर सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बिजली लाइनों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने एकीकृत विद्युत कटौती प्रबंधन प्रणाली (आईओएमएस) लागू की है। लाइन पर काम करने से पहले ऑनलाइन परमिट लेना अनिवार्य है, ताकि संबंधित क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद होने और कार्य की जानकारी का रिकॉर्ड रहे।

व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल

बेलखेड़ा वितरण केंद्र में 11 केवी लाइन पर सुधार कार्य के दौरान आउटसोर्स कर्मचारी बिहारी लाल बर्मन की करंट लगने से मौत ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में कर्मचारी पोल से करीब 16 फीट नीचे गिर गया था।


जांच कार्यपालन अभियंता पाटन नीरज परस्ते करेंगे

मामले की जांच कार्यपालन अभियंता पाटन नीरज परस्ते करेंगे। उन्हें तीन दिन में रिपोर्ट सौंपनी है। बताया गया है कि घटनास्थल पर 11 केवी की दो लाइनें गुजरती हैं। अधिकारियों के अनुसार, नरसिंहपुर जिले की सीमा नजदीक होने के कारण वहां से बिजली आपूर्ति की संभावित भूमिका की भी जांच की जाएगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि करंट किस लाइन में आया था।

ऑनलाइन परमिट के बाद भी सुरक्षा की गारंटी क्यों नहीं?

आईओएमएस का उद्देश्य बिजली कटौती, ब्रेकडाउन और मेंटेनेंस कार्यों का डिजिटल रिकार्ड रखकर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है। ऑनलाइन परमिट व्यवस्था से बिना पूर्व सूचना के लाइन पर काम शुरू होने की आशंका कम करने का दावा किया गया था।

बिजली आपूर्ति बंद करने के दावे फेल

  • बेलखेड़ा की घटना में परमिट जारी होने और बिजली आपूर्ति बंद किए जाने के दावे के बावजूद कर्मचारी की मौत हुई है।
  • ऐसे में जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि परमिट किस लाइन के लिए जारी किया गया था।
  • क्या संबंधित दोनों लाइनों की स्थिति की पुष्टि की गई थी और कार्य से पहले सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।
  • यह भी जांच का विषय है कि ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज जानकारी और मौके पर बिजली आपूर्ति की वास्तविक स्थिति में कोई अंतर तो नहीं था।
  • जबलपुर संभाग में एक साल के भीतर बिजली कर्मचारियों की करंट लगने से मौत की यह पांचवीं घटना है।
  • बार-बार होने वाले ऐसे हादसे सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, उनके अनिवार्य उपयोग और कार्यस्थल पर निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।

जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने की शिकायतें

विभागीय व्यवस्था के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों से पोल पर चढ़कर बिजली लाइन का काम कराने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद लाइन स्टाफ की कमी के कारण ऐसे कर्मचारियों से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

सुरक्षा उपकरणों के बिना काम की बात

हादसों की प्रारंभिक जांच में सुरक्षा उपकरणों के बिना काम किए जाने की बात भी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, बेलखेड़ा की घटना में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं और उनका उपयोग किया गया था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

किसानों के पंप कनेक्शन काटने पहुंचे थे कर्मचारी

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ किसानों ने 24 घंटे बिजली आपूर्ति वाली लाइन से पंप कनेक्शन जोड़ रखे थे। इसकी जानकारी मिलने पर कर्मचारी बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान लाइन में सुधार कार्य करते समय हादसा हुआ। इस पहलू की भी जांच की जानी है कि कर्मचारी किस कार्य के लिए पोल पर चढ़ा था और उस समय लाइन की विद्युत स्थिति क्या थी।

परिवार में अकेला कमाने वाला था बिहारी लाल

बिहारी लाल बर्मन लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। परिवार में वही अकेला कमाने वाला था। उसके दो बच्चे हैं। हादसे के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपये की सहायता राशि देने और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

अब जांच में तीन सवाल अहम होंगे

ऑनलाइन परमिट के बावजूद लाइन में करंट कैसे आया, सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं और प्रतिबंध के बावजूद आउटसोर्स कर्मचारी से जोखिमपूर्ण काम क्यों कराया जा रहा था। इन सवालों के जवाब न केवल हादसे की वजह स्पष्ट करेंगे, बल्कि आईओएमएस की वास्तविक उपयोगिता और बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति भी सामने लाएंगे।

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