पदोन्नति नियम 2025 के दो नियमों को असंवैधानिक करार देने की मांग, हाई कोर्ट में याचिका दायर
मध्य प्रदेश शासन के पदोन्नति नियम 2025 के दो प्रावधानों को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में इन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विरुद्ध बताय ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Jan 2026 07:59:01 AM (IST)Updated Date: Tue, 13 Jan 2026 07:59:01 AM (IST)
हाई कोर्ट में मध्य प्रदेश शासन के पदोन्नति नियम 2025 के दो नियमों के खिलाफ याचिका दायर। (फाइल फोटो)HighLights
- पदोन्नति नियम 2025 के दो प्रावधान असंवैधानिक बताए गए।
- आरक्षित वर्ग सूची पहले बनाने पर सुप्रीम कोर्ट निर्देश उल्लंघन।
- अनारक्षित में मेरिटोरियस आरक्षित उम्मीदवार को नुकसान का आरोप।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट में एक याचिका के जरिए मध्य प्रदेश शासन के पदोन्नति नियम 2025 के दो नियमों को असंवैधानिक बताया गया है। हाई कोर्ट ने इस याचिका को पूर्व में लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न करते हुए 13 जनवरी को सुनवाई निर्धारित की है। याचिकाकर्ता सिवनी निवासी ज्वाइंट डायरेक्टर सुरेश कुमरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर पक्ष रखेंगे।
उन्होंने अवगत कराया कि राज्य शासन के पदोन्नति नियम के रूल 11 में कहा गया है कि प्रमोशन के लिए पहले आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों की सूची बनाई जाएगी। उसके बाद अनारक्षित वर्ग की सूची बनेगी। इस नियम के तहत अनारक्षित में मेरिट के आधार पर आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार पदोन्नति नहीं पा सकेगा। यह नियम सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पहले अनारक्षित वर्ग की पदोन्नति के लिए डीपीसी की जाएगी। इसमें सभी वर्गों के मेरिटोरियस कर्मचारियों को अनुभव व योग्यता के मापदंड के आधार पर शामिल किया जाएगा। राज्य शासन इसका पालन नहीं कर रही है।
याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 के निर्देशानुसार केंद्र सरकार व कुछ अन्य राज्यों ने डीपीसी में एक पद के विरुद्ध पांच गुना अभ्यर्थियों को शामिल करने की व्यवस्था दी है। जबकि मप्र के नियमों में महज तीन गुना है।
दरअसल, कुमरे ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट में जाने की सलाह दी थी। याचिकाकर्ता ने 27 नवंबर, 2025 को सरकार को अभ्यावेदन देकर उक्त नियमों में सुधार करने की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।