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परीक्षा से एक घंटे पहले उच्‍च न्‍यायालय पहुंची याचिका, कोर्ट ने कहा- रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हों

याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से फीस का भुगतान नहीं किए जाने के आधार पर विश्वविद्यालय ने छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 08:39:22 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 08:39:22 PM (IST)
परीक्षा से एक घंटे पहले उच्‍च न्‍यायालय पहुंची याचिका, कोर्ट ने कहा- रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हों
परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। नईदुनिया

HighLights

  1. फीस भुगतान को लेकर विश्वविद्यालय और सरकार के विवाद
  2. खामियाजा छात्रों नहीं भुगतेंगे, रादुवि से चार सप्ताह में जवाब तलब
  3. छात्रों की ओर से त्वरित सुनवाई के लिए आवेदन पेश किया गया

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । परीक्षा शुरू होने में महज एक घंटा शेष था और चार छात्रों के सामने परीक्षा से वंचित होने का संकट था। ऐसे में छात्रों की ओर से हाई कोर्ट में त्वरित सुनवाई के लिए आवेदन पेश किया गया। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई करते हुए छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश जारी किए।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को नोटिस जारी

साथ ही रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता शिवांकी तिवारी, राहुल दुबे, रितेश कुमार पांडे और तौफीक की ओर से अधिवक्ता देवेंद्र कुमार कुशवाहा व अंजलि तिवारी ने याचिका दायर की।

शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत प्रवेश मिला था

बताया गया कि सभी छात्र रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूटीडी विभाग में एमएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम में अध्ययनरत हैं। उन्हें मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के तहत प्रवेश मिला था। योजना के अनुसार पात्र स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को मेस खर्च और काशन मनी का भुगतान करना था, जबकि प्रवेश, नामांकन और परीक्षा शुल्क का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाना था।


फीस का भुगतान नहीं होने से परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी

याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से फीस का भुगतान नहीं किए जाने के आधार पर विश्वविद्यालय ने छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। शिवांकी तिवारी और राहुल दुबे दूसरे सेमेस्टर व रितेश कुमार पांडे और तौफीक अंतिम यानी चौथे सेमेस्टर में अध्ययनरत हैं।

परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि दाखिला देने वाला संस्थान स्वशासी है। छात्रों के अभ्यावेदन पर उन्हें पहले कुछ विषयों की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी, दूसरे सेमेस्टर के दो विषय और चौथे सेमेस्टर के एक विषय की परीक्षा होने के बाद परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर छात्रों ने परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अधिवक्ता को बुलाकर छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए

परीक्षा दोपहर 12 बजे से निर्धारित थी। एकलपीठ ने पूर्वान्ह 11 बजे विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को बुलाकर छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अपने आदेश में प्रथमदृष्टया कहा कि परीक्षा शुल्क के भुगतान को लेकर विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के बीच आपसी विवाद है।

सामान्य तौर पर इस भुगतान का भार छात्रों पर नहीं था

कोर्ट ने छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश देते हुए विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया है। साथ ही स्पष्ट किया कि परीक्षा में शामिल होने का परिणाम याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

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