
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में वर्ष 2016-17 की देशी मदिरा टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कथित सिंडीकेट और प्रतिस्पर्धा संबंधी अनियमितताओं के मामले में हाई कोर्ट ने सात शराब कारोबारियों और डिस्टलरीज की याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
कोर्ट ने पूर्व में लगाई गई रोक हटाते हुए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को जांच पूरी कर प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 27 के तहत अंतिम आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं। युगलपीठ ने कहा कि संबंधित कंपनियों के पास सीसीआई की कार्रवाई के विरुद्ध राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) में अपील करने का वैधानिक विकल्प उपलब्ध था।
ऐसे में सीधे हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता। कोर्ट ने इसी आधार पर सभी सात याचिकाएं खारिज कर दीं। मामला वर्ष 2016-17 की देशी मदिरा टेंडर प्रक्रिया में कथित रूप से सिंडीकेट बनाकर हेराफेरी किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। कैग रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बाद सीसीआई ने मामले का संज्ञान लेकर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान 27 अक्टूबर 2021 को सीसीआई के महानिदेशक की ओर से संबंधित डिस्टलरीज के परिसरों में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई थी। कंपनियों ने इसी कार्रवाई और जांच को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं।
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सीसीआई की जांच पर रोक लगा दी थी। अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद युगलपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने रोक हटा दी है। सीसीआई को जांच आगे बढ़ाकर पूरी करनी होगी और धारा 27 के तहत अंतिम आदेश पारित करना होगा।
याचिकाकर्ताओं में एसोसिएटेड एल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज लिमिटेड, ग्रेट गेलिलियन वेंचर्स लिमिटेड, ओएसिस डिस्टलरीज लिमिटेड (इंदौर), बापुना एल्कोब्रू प्राइवेट लिमिटेड और अग्रवाल डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड (ग्वालियर), विंध्याचल डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड (भोपाल) तथा डीसीआर डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड (सागर) शामिल हैं।
यह भी पढ़ें- अब खंडवा में भी रुकेगी जबलपुर-पुणे एक्सप्रेस ट्रेन, कल से शुरू होगा ठहराव, रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों को मिलेगा लाभ