
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत मरीजों के कैशलेस इलाज पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है, लेकिन राहत अधूरी है। जबलपुर सहित मध्य प्रदेश के निजी अस्पताल आठ अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले थे। भोपाल में सात और आठ अक्टूबर को आयुष्मान विभाग के सीईओ तथा दीनदयाल स्वास्थ्य सुरक्षा परिषद के साथ लंबी बातचीत के बाद हड़ताल टाल दी गई। अस्पतालों ने इलाज जारी रखने का फैसला लिया है।
सरकार ने भुगतान प्रक्रिया तेज करने और नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हास्पिटल्स (एनएबीएच) प्रमाणपत्र की अनिवार्यता से फिलहाल छूट देने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद भुगतान और अस्पतालों की पात्रता को लेकर विवाद बरकरार है। जबलपुर के करीब 70 निजी अस्पतालों का 50 से 60 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा है, जबकि एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेश स्तर पर पोर्टल-1 में 1200 करोड़ और पोर्टल-2 में 1500 करोड़ रुपये अटके हैं।
दूसरी ओर, विभाग जून से अब तक 650 करोड़ रुपये का भुगतान क्लियर करने की जानकारी दे रहा है। उल्लेखनीय है कि मप्र नर्सिंग होम एसोसिएशन की जबलपुर शाखा से 111 अस्पताल संबद्ध हैं और ये सभी आयुष्मान योजना से जुड़े हैं।
प्रदेश में करीब 4.5 करोड़ लोगों के पास आयुष्मान कार्ड है। जबलपुर जिले में लगभग 111 निजी अस्पताल आयुष्मान से जुड़े थे, अब सात हटने के बाद 106 अस्पतालों में ही सुविधा बची है। शहर के बड़े निजी अस्पतालों में मेट्रो, सुखसागर, महाकोशल, जबलपुर हास्पिटल आदि में आज आयुष्मान काउंटर पर मरीज आ रहे हैं। लेकिन जिन सात अस्पतालों को लिस्ट से हटाया गया है, वहां आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद हो गया है।
30 दिन के भीतर भुगतान की गारंटी और टेक्निकल कारणों से रिजेक्ट क्लेम का लिखित कारण बताना। एनएबीएच को अनिवार्य की जगह इंसेंटिव बेस्ड करना, जैसा पहले था।, पैकेज रेट का रिवीजन।
पोर्टल में दिक्कत: बरेला से आए सुनील पटेल ने बताया, "पिता का हर्निया आपरेशन कराना है। आयुष्मान कार्ड है। पहले जिस अस्पताल में दिखाया, वहां कहा गया कि आयुष्मान बंद है, दूसरे अस्पताल भेज दिया। यहां आए तो कहा 2 दिन बाद आना, पोर्टल में दिक्कत है।
पैकेज अप्रूवल में समय लग रहा : गौरीघाट की रहने वाली रेखा बर्मन बोलीं, "मेरे पति को सांस की तकलीफ है। रसल चौक स्थित अस्पताल गए तो कार्ड को लेकर दिक्कत आई तो जिला अस्पताल के आयुष्मान कक्ष भेज दिया गया। यहां पात्रता पर्ची को लेकर आयुष्मान काउंटर पर आधे घंटे लाइन में लगी रही। बताया गया कि आपका कार्ड तो ठीक है, पर पैकेज अप्रूवल में समय लगेगा। पहले तो तुरंत हो जाता था।
पात्रता पर्ची के लिए घंटों इंतजार: आयुष्मान योजना में इलाज को लेकर सबसे बड़ी अड़चन पैकेज या भुगतान नहीं, बल्कि आयुष्मान की पात्रता पर्ची बन गई है। निजी अस्पतालों में आने वाले 100 में से 30-40 मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
जबलपुर के प्राइवेट अस्पतालों का आरोप है कि आयुष्मान के तहत किए गए इलाज का पैसा 5-6 महीने से नहीं मिला है।, जबलपुर के करीब 70 निजी अस्पतालों का 50 से 60 करोड़ रुपये बकाया है।, पूरे प्रदेश में यह बकाया 1200 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।एसोसिएशन के मुताबिक पोर्टल-1 में 1200 करोड़ और पोर्टल-2 में 1500 करोड़ रुपये अटके हुए हैं।
आयुष्मान विभाग का कहना है कि जून से अब तक 650 करोड़ रुपये का भुगतान क्लीयर किया गया है।
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