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Promotion in MP: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दी राहत, पदोन्नति आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा; राज्य सरकार को नोटिस

मध्य प्रदेश हाई के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सीहोर के वनरक्षक की याचिका पर राज्य शासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्त...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 28 Jul 2026 02:46:40 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Jul 2026 03:03:28 PM (IST)
Promotion in MP: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दी राहत, पदोन्नति आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा; राज्य सरकार को नोटिस
पदोन्नति आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

HighLights

  1. पदोन्नति आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा
  2. सीहोर के वनरक्षक की याचिका पर एमपी हाई कोर्ट सख्त
  3. 2008 की मेरिट लिस्ट के आधार पर प्रमोशन को चुनौती

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सीहोर के वनरक्षक की याचिका पर राज्य शासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश

साथ ही अंतरिम राहत देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में वनपाल पद पर कोई पदोन्नति आदेश जारी किया जाता है तो वह इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। याचिकाकर्ता संतोष कुमार साहू की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा व जितेंद्र गर्ग ने पक्ष रखा।


वरिष्ठता सूची में कनिष्ठ कर्मचारियों से नीचे दर्शाने का मामला

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता 30 सितंबर 2008 से वनरक्षक के पद पर कार्यरत है। विभाग ने 21 जुलाई 2025 व एक अप्रैल, 2026 की वरिष्ठता सूची में उसे उसके कनिष्ठ कर्मचारियों से नीचे दर्शाया तथा 10 जुलाई, 2026 को उसकी आपत्ति भी निरस्त कर दी। इसके बाद कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

यह भी पढ़ें- एमपी के 82 लाख किसानों के लिए खुशखबरी, मुख्यमंत्री ने खातों में ट्रांसफर किए ₹3,300 करोड़, किसान कल्याण योजना की राशि अंतरित

पदोन्नति का आधार वरिष्ठता-सह-योग्यता होना चाहिए

पदोन्नति का आधार वरिष्ठता-सह-योग्यता होना चाहिए, जबकि विभाग ने योग्यता-सह-वरिष्ठता के आधार पर निर्णय लेते हुए 2008 की भर्ती की मेरिट सूची को आधार बना लिया। इससे मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सामान्य सेवा शर्तें) नियम, 1961 का उल्लंघन हुआ और याचिकाकर्ता के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है व स्पष्ट किया है कि इस बीच जारी होने वाला कोई भी पदोन्नति आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।