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जबलपुर के 529 गांवों में पांच लाख लोगों की रजिस्ट्री अटकी, पटवारियों ने खींचे हाथ

गांवों में संपत्तियों और पात्र हितग्राहियों की जानकारी जुटाने से लेकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू करने तक की तैयारी की गई थी, लेकिन मैदानी अमले की आपत...और पढ़ें

By Atul ShuklaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 09:54:16 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 09:54:16 PM (IST)
जबलपुर के 529 गांवों में पांच लाख लोगों की रजिस्ट्री अटकी, पटवारियों ने खींचे हाथ
स्वामित्व अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर स्थित संपत्तियों का दस्तावेजीकरण कर लोगों को उनकी संपत्ति का अधिकार प्रमाणित करने की प्रक्रिया की जानी है। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. तहसीलदारों ने भी नहीं संभाली जिम्मेदारी
  2. 17 सितंबर से शुरू होना था अभियान
  3. सात दिन बीते एक भी रजिस्ट्री नहीं

नईदुनिया प्रतिनिधि,जबलपुर। जिले के 529 गांवों में करीब पांच लाख लोगों को उनकी संपत्ति का स्वामित्व दस्तावेज दिलाने के लिए तैयार किया गया स्वामित्व अभियान शुरुआत से पहले ही अटक गया है। 17 सितंबर से गांवों में रजिस्ट्री का काम शुरू होना था।

प्रशासन एक माह से तैयारी में जुटा था

पटवारियों के काम करने से पीछे हटने के बाद पूरी प्रक्रिया ठप हो गई। निर्धारित तारीख के सात दिन बाद भी एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि प्रशासन पिछले करीब एक माह से इस अभियान की तैयारी में जुटा था।


बड़ी संख्या में ग्रामीणों को इसका लाभ मिलना है

जिले में इसके लिए 529 गांवों को शामिल किया गया है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों को इसका लाभ मिलना है। अभियान को तीन चरणों में पूरा किया जाना है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर गांववार तैयारी की गई थी और संबंधित अमले को जिम्मेदारी भी दी गई थी।

ज्ञापन देकर पटवारियों ने जताई आपत्ति

अभियान शुरू होने से पहले पटवारियों ने अपनी आपत्तियां प्रशासन के सामने रख दीं। पटवारियों ने ज्ञापन सौंपकर अभियान में दी गई जिम्मेदारियों पर असहमति जताई है। इसके बाद मैदानी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया। वहीं, तहसील स्तर पर भी अधिकारियों द्वारा इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी संभालने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

कागजों में तैयारियों तक सीमित रह गया अभियान

नतीजा यह रहा कि जिस अभियान को 17 सितंबर से गांव-गांव शुरू होना था, वह कागजों में तैयारियों तक सीमित रह गया। इधर प्रशासन ने अभियान को लेकर करीब एक माह पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। गांवों में संपत्तियों और हितग्राहियों से संबंधित जानकारी जुटाई गई। रजिस्ट्री के लिए आवश्यक दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।

दस्तावेज दुरुस्त करने में जुटा अमला

स्वामित्व अभियान शुरू नहीं होने के कारण प्रशासनिक अमला इन दिनों उससे जुड़े दूसरे कामों में लगा हुआ है। पटवारी किसान रजिस्ट्री के साथ ही स्वामित्व अभियान में उपयोग होने वाले दस्तावेजों और रिकॉर्ड को दुरुस्त करने का काम कर रहे हैं।

फिलहाल तैयारी और रिकार्ड सुधार तक सीमित

जिस अभियान के तहत सीधे ग्रामीणों की संपत्ति की रजिस्ट्री होनी थी, उसका मैदानी काम शुरू होने के बजाय फिलहाल तैयारी और रिकार्ड सुधार तक सीमित है। इधर स्वामित्व अभियान को जिले के 529 गांवों में तीन चरणों में पूरा किया जाना है।

आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी

पात्र संपत्तियों और हितग्राहियों की पहचान, आवश्यक रिकार्ड और दस्तावेजों की जांच तथा इसके बाद स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया होनी है, लेकिन पहले चरण में ही जिम्मेदारी को लेकर खींचतान सामने आने से आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।

इसलिए हैं फायदेमंद योजना

  • अभियान का सीधा असर जिले के करीब पांच लाख ग्रामीणों पर पड़ना है।
  • ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का स्वामित्व दस्तावेज मिलेंगे।
  • इससे जमीन और मकान से जुड़े अधिकारों के रिकार्ड मजबूत होंगे।
  • अभियान शुरू नहीं होने से इन ग्रामीणों को फिलहाल इंतजार करना पड़ रहा है।

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