
नईदुनिया प्रतिनिधि,जबलपुर। जिले के 529 गांवों में करीब पांच लाख लोगों को उनकी संपत्ति का स्वामित्व दस्तावेज दिलाने के लिए तैयार किया गया स्वामित्व अभियान शुरुआत से पहले ही अटक गया है। 17 सितंबर से गांवों में रजिस्ट्री का काम शुरू होना था।
पटवारियों के काम करने से पीछे हटने के बाद पूरी प्रक्रिया ठप हो गई। निर्धारित तारीख के सात दिन बाद भी एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि प्रशासन पिछले करीब एक माह से इस अभियान की तैयारी में जुटा था।
जिले में इसके लिए 529 गांवों को शामिल किया गया है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों को इसका लाभ मिलना है। अभियान को तीन चरणों में पूरा किया जाना है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर गांववार तैयारी की गई थी और संबंधित अमले को जिम्मेदारी भी दी गई थी।
अभियान शुरू होने से पहले पटवारियों ने अपनी आपत्तियां प्रशासन के सामने रख दीं। पटवारियों ने ज्ञापन सौंपकर अभियान में दी गई जिम्मेदारियों पर असहमति जताई है। इसके बाद मैदानी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया। वहीं, तहसील स्तर पर भी अधिकारियों द्वारा इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी संभालने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
नतीजा यह रहा कि जिस अभियान को 17 सितंबर से गांव-गांव शुरू होना था, वह कागजों में तैयारियों तक सीमित रह गया। इधर प्रशासन ने अभियान को लेकर करीब एक माह पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। गांवों में संपत्तियों और हितग्राहियों से संबंधित जानकारी जुटाई गई। रजिस्ट्री के लिए आवश्यक दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
स्वामित्व अभियान शुरू नहीं होने के कारण प्रशासनिक अमला इन दिनों उससे जुड़े दूसरे कामों में लगा हुआ है। पटवारी किसान रजिस्ट्री के साथ ही स्वामित्व अभियान में उपयोग होने वाले दस्तावेजों और रिकॉर्ड को दुरुस्त करने का काम कर रहे हैं।
जिस अभियान के तहत सीधे ग्रामीणों की संपत्ति की रजिस्ट्री होनी थी, उसका मैदानी काम शुरू होने के बजाय फिलहाल तैयारी और रिकार्ड सुधार तक सीमित है। इधर स्वामित्व अभियान को जिले के 529 गांवों में तीन चरणों में पूरा किया जाना है।
पात्र संपत्तियों और हितग्राहियों की पहचान, आवश्यक रिकार्ड और दस्तावेजों की जांच तथा इसके बाद स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया होनी है, लेकिन पहले चरण में ही जिम्मेदारी को लेकर खींचतान सामने आने से आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
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