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आदिवासी नाबालिग पीड़िता के आरोपों को साबित नहीं कर सका अभियोजन, दुष्कर्म का आरोपी दोषमुक्त

अदालत ने डीएनए रिपोर्ट, चिकित्सीय साक्ष्य और बयानों में सामने आई विसंगतियों को फैसले का महत्वपूर्ण आधार माना।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 09:54:44 PM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 09:54:44 PM (IST)
आदिवासी नाबालिग पीड़िता के आरोपों को साबित नहीं कर सका अभियोजन, दुष्कर्म का आरोपी दोषमुक्त

HighLights

  1. कोर्ट ने कहा-पाक्सो की वैधानिक उपधारणा से पहले आधारभूत तथ्य जरूरी
  2. प्रकरण दर्ज कर आरोपपत्र पेश किया था, डीएनए रिपोर्ट में पुष्टि नहीं
  3. शादी का प्रलोभन देकर नाबालिग से बार-बार शारीरिक संबंध बनाए थे

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नाबालिग आदिवासी बालिका से दुष्कर्म के गंभीर आरोपों के मामले में विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।

पहले आवश्यक आधारभूत तथ्य स्थापित करने होंगे

अदालत ने डीएनए रिपोर्ट, चिकित्सीय साक्ष्य और बयानों में सामने आई विसंगतियों को फैसले का महत्वपूर्ण आधार माना। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एवं पाक्सो) अभिलाषा एनआर मनवार की अदालत ने स्पष्ट किया कि पाक्सो एक्ट की धारा 29 और 30 के तहत वैधानिक उपधारणा लागू करने के लिए अभियोजन को पहले आवश्यक आधारभूत तथ्य स्थापित करने होंगे।

नाबालिग से बार-बार शारीरिक संबंध बनाए

अभियोजन के अनुसार, पाटन निवासी सौरभ लोधी ने 15 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच शादी का प्रलोभन देकर नाबालिग से बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, पाक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपपत्र पेश किया था।


बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता धनराज सिंह चौधरी और शशिभूषण सिंह चौधरी ने दलील दी कि डीएनए रिपोर्ट आरोप की पुष्टि नहीं करती और चिकित्सीय साक्ष्य भी अभियोजन के कथन का समर्थन नहीं करते। पीड़िता की अवयस्कता के प्रमाण तथा पुलिस को दिए गए कथनों और अदालत में दर्ज बयानों के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए गए।

गंभीर आरोप अपने आप में दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकते

अदालत ने समग्र साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा। फैसले में रेखांकित किया गया कि गंभीर आरोप अपने आप में दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकते।

अभियोजन को मामले के आवश्यक आधारभूत तथ्य प्रमाणित करने होते हैं

पाक्सो कानून में निर्धारित वैधानिक उपधारणाओं का सहारा लेने से पहले अभियोजन को मामले के आवश्यक आधारभूत तथ्य प्रमाणित करने होते हैं।

आरोपी को तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश

अदालत ने घटना प्रमाणित नहीं होने के आधार पर पाक्सो एक्ट की धारा 33(8) के तहत पीड़िता को प्रतिकर दिए जाने का औचित्य भी नहीं माना। आरोपी को तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया गया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।

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