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यूसीसी विधेयक पारित होने के बाद एमपी हाई कोर्ट से वापस हुई जनहित याचिका

कोर्ट ने कहा कि यदि लागू यूसीसी कानून के किसी प्रविधान की संवैधानिक वैधता पर विवाद हो तो उसे पृथक याचिका के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 27 Jul 2026 01:45:20 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 02:07:07 PM (IST)
यूसीसी विधेयक पारित होने के बाद एमपी हाई कोर्ट से वापस हुई जनहित याचिका
अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका को वापस मान लिया।

HighLights

  1. कानून की वैधता को चुनौती देने की रहेगी स्वतंत्रता
  2. राष्ट्रीय आयोगों से आवश्यक परामर्श नहीं किया गया
  3. अनिवार्य पंजीयन के प्रवि‍धान पर भी आपत्ति जताई थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने के बाद उससे संबंधित जनहित याचिका हाई कोर्ट से वापस ले ली गई।

अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका वापस

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता के अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका को वापस लिया हुआ मानकर निरस्त कर दिया।

दायर याचिका अब निष्प्रभावी (इन्फ्रक्टुअस) हो गई

भविष्य में यूसीसी कानून की संवैधानिक वैधता को नई याचिका के माध्यम से चुनौती दी जा सकेगी। भोपाल नगर निगम के पूर्व पार्षद मेवा लाल द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि राज्य विधानसभा से यूसीसी विधेयक पारित होने के कारण पूर्व में दायर याचिका अब निष्प्रभावी (इन्फ्रक्टुअस) हो गई है।

कोर्ट ने यह आग्रह स्वीकार कर याचिका निरस्त कर दी

इसलिए भविष्य में कानून को चुनौती देने की स्वतंत्रता सुरक्षित रखते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने यह आग्रह स्वीकार कर याचिका निरस्त कर दी।

राष्ट्रीय आयोगों से आवश्यक परामर्श नहीं किया गया

दरअसल, याचिका में आरोप लगाया गया था कि यूसीसी लागू करने से पहले संविधान के अनुच्छेद 338(9), 338ए(9) और 338बी(9) के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय आयोगों से आवश्यक परामर्श नहीं किया गया।

अनिवार्य पंजीयन के प्रवि‍धान पर भी आपत्ति जताई गई थी

इसके अलावा पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकारों व लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीयन के प्रवि‍धान पर भी आपत्ति जताई गई थी।

पृथक याचिका के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है

राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने पक्ष रखा। कोर्ट ने कहा कि यदि लागू यूसीसी कानून के किसी प्रविधान की संवैधानिक वैधता पर विवाद हो तो उसे पृथक याचिका के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है।


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