
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के जिन विभागों में कभी पढ़ाई के साथ शोध की गतिविधियां भी जोर-शोर से होती थीं, वहां अब नियमित शिक्षकों का संकट गहराता जा रहा है। बायोसाइंस विभाग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। विभाग में कभी करीब 18 प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर कार्यरत रहे हैं, लेकिन अब नियमित शिक्षकों की संख्या घटकर बेहद कम रह गई है। विभागाध्यक्ष प्रो. एसएस संधू भी अप्रैल 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
ऐसे में आने वाले महीनों में विभाग की नियमित शैक्षणिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर वर्तमान में बायोलॉजिकल साइंस विभाग में प्रो. एसएस संधू और प्रो. रवि प्रकाश मिश्रा के नाम प्रोफेसर के रूप में दर्ज हैं। विभाग की स्थापना 1968 में हुई थी और यहां पीजी अध्ययन एवं शोध की व्यवस्था है।
विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार बायोसाइंस विभाग में नियमित शिक्षक की आखिरी नियुक्ति वर्ष 1989 में प्रो. एसएस संधू की हुई थी। इसके बाद नई नियमित नियुक्तियां नहीं होने से धीरे-धीरे सेवानिवृत्ति के साथ पद खाली होते गए। स्थिति यह हो गई कि जिस विभाग में कभी शिक्षकों की पूरी टीम हुआ करती थी, वहां अब विभाग का संचालन सीमित शिक्षकों के भरोसे है।
संकट सिर्फ बायोसाइंस तक सीमित नहीं है। केमिस्ट्री विभाग में भी पिछले कई वर्षों से नियमित शिक्षकों की कमी बनी हुई है। फिजिक्स विभाग में भी कार्यरत प्रोफेसरों की संख्या बेहद कम है और वर्तमान शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने के बाद यहां भी नियमित अध्यापन प्रभावित होने की आशंका है।
विश्वविद्यालय के कई अन्य विभाग भी इसी समस्या से गुजर रहे हैं। योग, फिलासफी, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, बीएड और समाजशास्त्र सहित कई विभागों में नियमित शिक्षकों की संख्या जरूरत के मुकाबले बेहद कम है या विभागों का काम सीमित नियमित शिक्षकों के सहारे चल रहा है।
ऐसे में अतिथि शिक्षकों से अध्यापन व्यवस्था संभालने की मजबूरी बन गई है। इसका असर केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है। नियमित शिक्षक ही विभागों में शोध निर्देशन, शोध परियोजनाओं, पीजी स्तर के अकादमिक मार्गदर्शन और विभागीय गतिविधियों की निरंतरता संभालते हैं। नियमित पद खाली रहने पर इन गतिविधियों पर भी असर पढ़ना स्वाभाविक है।
शिक्षकों की कमी को लेकर जून 2026 में प्रकाशित नईदुनिया की रिपोर्ट में प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों की स्थिति सामने आई थी। इसमें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में 156 स्वीकृत शिक्षक पदों के मुकाबले 18 नियमित शिक्षक कार्यरत और 138 पद रिक्त बताए गए थे। सितंबर 2026 की नईदुनिया रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की स्थिति में कुछ बदलाव दर्ज हुआ। इसमें 156 स्वीकृत पदों में 26 नियमित शिक्षक और 130 पद रिक्त बताए गए हैं। यानी हाल में कुछ नियुक्तियां/कार्यभार होने के बावजूद विश्वविद्यालय में अभी भी करीब 83 प्रतिशत शिक्षक पद खाली हैं।
विश्वविद्यालय ने मई 2026 में नियमित सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 23 मई 2026 को सहायक प्राध्यापक भर्ती का विज्ञापन और जून में उससे जुड़े संशोधन दर्ज हैं। भर्ती विज्ञापन में बायोसाइंस, केमिस्ट्री, अर्थशास्त्र, हिंदी, फिलासफी, फिजिक्स, राजनीति शास्त्र, संस्कृत और समाजशास्त्र समेत कई विषयों के पद शामिल किए गए थे। विज्ञापन में पदों की संख्या 28 बताई गई थी।
इससे यह स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय ने खाली पद भरने की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन दशकों से चली आ रही रिक्तियों के मुकाबले यह भर्ती आवश्यकता की तुलना में सीमित है। उधर, वरिष्ठ शिक्षकों की सेवानिवृत्ति का सिलसिला जारी है। यानी नई भर्ती की रफ्तार और सेवानिवृत्ति की रफ्तार के बीच संतुलन बनाना विश्वविद्यालय के सामने बड़ी चुनौती है।
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रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को NAAC से 'ए' ग्रेड प्राप्त है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट भी इसे नैक से एक ग्रेड प्राप्त यूनिवर्सिटी में प्राध्यापकों के रिक्त पदों की वजह से शैक्षणिक और शोध कार्य प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश के अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों में भी यही स्थिति सामने आई है। पूरे प्रदेश के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों में 2103 स्वीकृत पदों में केवल 421 नियमित शिक्षक कार्यरत थे और 1682 पद खाली थे।