सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद भी नहीं जागा बम्हनी प्रशासन, ठरका बना अवैध शराब का हब
सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है, लेकिन इस हादसे के बाद भी बम्हनीबंजर थाना पुलिस की नींद नहीं टूटी है।
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 06:50:54 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 06:53:53 PM (IST)
HighLights
- थाना प्रभारी बोले- कार्रवाई जारी है
- मुखबिर तंत्र फेल, मीडिया कर्मी दे रहे लोकेशन
- शराब लाकर सबसे पहले ठरका में डंप की जाती है
नईदुनिया न्यूज, बम्हनीबंजर। सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है, लेकिन इस हादसे के बाद भी बम्हनीबंजर थाना पुलिस की नींद नहीं टूटी है। थाना क्षेत्र से लगा ग्राम ठरका अब अवैध शराब के कारोबार का सबसे बड़ा हब बनता जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो ठरका इस पूरे अवैध कारोबार का मेन स्टॉक सेंटर बन गया है। पिंडरई और नैनपुर से बड़ी मात्रा में अवैध शराब लाकर सबसे पहले ठरका में डंप की जाती है। इसके बाद यहां से ग्वारा, ढेकों समेत आसपास के गांवों में कोचियों के जरिए सप्लाई की जा रही है।
शाम ढलते ही ठरका, ग्वारा और ढेकों के आउटर इलाकों, ढाबों और बस्तियों में कोचिये सक्रिय हो जाते हैं। खुलेआम गांव-गांव शराब परोसी जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
थाना प्रभारी बोले- कार्रवाई जारी है
इस पूरे मामले में थाना प्रभारी सत्येंद्र रघुवंशी का कहना है कि अवैध शराब पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। खबरों को गंभीरता से लेते हुए हाल ही में भी कार्रवाई की गई है। अब तक दो दर्जन से अधिक मामले पंजीबद्ध किए जा चुके हैं। लेकिन हकीकत जमीनी स्तर पर कुछ और ही है।
सवाल यही है कि जब सब कुछ सामने है, तो ठरका के इस मुख्य स्टॉक पर बड़ी कार्रवाई कब होगी। स्थानीय लोगों को अब भी उम्मीद है कि पुलिस ठरका के नेटवर्क को तोड़ते हुए ग्वारा और ढेकों तक फैले इस पूरे रैकेट पर शिकंजा कसेगी।
मुखबिर तंत्र फेल, मीडिया कर्मी दे रहे लोकेशन
नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब का कारोबार बेखौफ जारी है, जबकि इसे रोकने के लिए बनाया गया पुलिस और आबकारी विभाग का मुखबिर तंत्र पूरी तरह फेल साबित हो रहा है।आलम यह है कि कार्रवाई के लिए पुलिस और आबकारी विभाग को मीडियाकर्मियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जानकारी मीडिया के माध्यम से विभाग तक पहुंचा रहे
मुखबिरों को अवैध बिक्री की भनक तक नहीं लग रही, जबकि लोकेशन से लेकर पूरी जानकारी मीडिया के माध्यम से विभाग तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सूचना मीडिया ही दे रहा हैं, तो लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया मुखबिर नेटवर्क और आबकारी अमला आखिर किस काम का है।
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